प्रश्नोत्तर P2-0183 · भाग 2
योगी जी, अतीत में अपनों ने हमें नहीं समझा — जब हमें मदद की जरूरत थी और हमने अपना समझकर, अधिकार से मांगी, तब उन्होंने टरका दिया, जबकि उसी समय किसी और की मदद कर दी। इससे दिल पर गहरी चोट लगी। वह समय बहुत पीछे छूट गया, मैं अपने बलबूते आगे भी बढ़ गया, पर आज भी कोई बात याद आ जाए तो वही दर्द फिर महसूस होता है। इन घायल करने वाली यादों को कैसे मिटाऊं, इनसे कैसे उबरूं?
उन यादों में दर्द इसलिए है कि जिस वक्त हमने उम्मीद रखी थी कि ये मेरी मदद करेंगे, कहीं न कहीं उनकी तरफ से अपनेपन का भाव मिला था — साथ रहते हुए उन्होंने कहा था कि मैं हूं, चिंता न करना। लेकिन जब जरूरत पड़ी, तो पता चला कि वह सिर्फ एक शब्द था; अपना भी बनाया, ‘मैं हूं ना’ भी बोला, और समय आने पर औकात भी दिखा दी — यह पीड़ा दे जाता है। पराया होता तो कोई फर्क नहीं पड़ता। वहां बात सिर्फ लेन-देन, पैसे, वैभव या जरूरत की नहीं रहती, एक भरोसा टूटता है; और मैं यह भी देख रहा हूं कि वह सक्षम है, मुझे न देकर किसी और को दे रहा है। तो जिस क्षण वह याद आता है, वही भाव बन जाता है।
मेरे जीवन में भी ऐसी कई घटनाएं हैं। अब याद आती हैं, पर दुख नहीं देतीं; पहले पीड़ा देती थीं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया। अब समझ में आता है कि वे वैसे ही थे — उनका काम था लोगों को भरोसा देना और तोड़ना; मुझे भरोसा भी किसी उम्मीद में दिया होगा, जब वह उम्मीद नहीं दिखी तो क्यों देते। एक कमेंट में किसी ने पूछा था कि क्या आपको घर-बचपन की याद आती है — याद सब आती है, लेकिन उस याद में सुख-दुख कुछ नहीं, कोई शिकायत नहीं। पहले जिन्होंने मदद नहीं की, उनके प्रति शिकायत थी, शिकवा था; अब नहीं, क्योंकि उनका नेचर ही ऐसा है।
जब तक ज्ञान नहीं होगा, तब तक शिकायत कहीं न कहीं छिपी रहेगी; ऐसा करने वालों के प्रति घृणा का भाव रहेगा, घिन आएगी, क्योंकि उन्होंने अपना बनाकर किया — और लगता है कि मेरा अधिकार था, उन्होंने आश्वासन दिया था, उनका दायित्व, कर्तव्य था। ज्ञान के बाद यह सब हट जाता है — न पीड़ा, न दुख, न शिकायत, न शिकवा — क्योंकि समझ में आ जाता है कि अपना तो कोई था ही नहीं, हम मान बैठे थे; यह जरूरत की दुनिया है। अपना सिर्फ एक ही है — गुरु। गुरु ही आखिरी जगह का मार्ग बताता है, आखिरी यात्रा करवाता है; बाकी जितने लोग यात्रा करवाते हैं, उपयोग करने के लिए। मां-बाप, भाई-बहन से जिंदगी शुरू होती है, और सबने मुझे उपयोग करना और उपयोग होना सिखाया; गुरु ही एक ऐसा है जो उपयोग करने और होने, दोनों से मुक्त कराता है। तो ज्ञान के बाद भी याद आती है, पर उन यादों में दुख, शिकायत, शिकवा नहीं होता।
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वीडियो: आखिर कब तक ये याद रहेगा ? #योगी · 2026-01-16