आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P2-0164 · भाग 2

तो क्या आपका कहना है कि पहले मैं तय करूं कि जीवन को किधर ले जाना है; जो चीजें और लोग मुझे आकर्षित कर रहे हैं, उनके पीछे न जाकर देखूं कि मेरे अंदर कमी क्या है और उसे पूरा करूं? संसार की चीजों से यह खालीपन भरता नहीं — एक इच्छा पूरी हो तो 70 नई खड़ी हो जाती हैं — फिर भी भीतर पक्का लगता है कि यह कभी न कभी भरेगा, बस दिशा गलत पकड़ ली थी। तो क्या पहले विचारों में उस दुनिया का चित्र बनाऊं जो मुझे बसानी है, और फिर काम करूं?

पहली बात तो, आप चाहते क्या हो — यह पक्का कर लो। जब यह पक्का हो जाए, तब (देखो) मैं वहां पहुंचूंगा कैसे, उसका मानचित्र (मैप) कहां है। पहले लक्ष्य; लक्ष्य बन गया, तो अब इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मेरे पास क्या-क्या साधन होने चाहिए। उन साधनों की व्यवस्था करो, और चल दो। ऐसा न हो कि निहत्थे युद्ध के मैदान में कूद पड़े, तो मारे जाओगे।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: आजादी का असली मतलब । #योगी · 2026-01-27