प्रश्नोत्तर P2-0130 · भाग 2
प्रणाम योगी जी। क्या ध्यान का अभ्यास करना चाहिए, या ईमानदारी, सत्कर्म और सत्संग ही मूल है और फिर ध्यान अपने आप घटने लगेगा?
ईमानदारी अपना लेंगे, सत्कर्म करेंगे, सत्संग सुनेंगे, तो उसमें ध्यान स्वाभाविक होगा; आपको ध्यान अलग से नहीं करना पड़ेगा, अपने आप होगा। ध्यान हमेशा स्वाभाविक होता है, क्योंकि ध्यान ‘चाहिए’ में होता है। देखना यह है कि आपको क्या चाहिए।
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