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प्रश्नोत्तर P2-0080 · भाग 2

गुरु जी, अगर कोई 30 दिनों में 30 रुपये कमाता है और आपके सत्संग व ऊर्जा का लाभ लेता है, तो उसे उसमें से आपको कितना सहयोग करना चाहिए?

जितना जरूरत पूर्ति करने के बाद बचे। पहले तो जरूरत पूर्ति करें; बचे तो करें, और न बचे तो इंतजार करें, यह भाव रखें कि अभी नहीं कर पा रहा, आगे करूंगा, या कुछ बचाकर करें। कोई तय नहीं कि इतना करना है। आपकी भी जरूरतें हैं, आवश्यकताएं हैं; आपके ऊपर जिम्मेदारी, दायित्व, कर्तव्य है। एक व्यक्ति ने मुझे लिखा कि क्या मैं ब्याज पर कर्ज लेकर आपको दे दूं? मैंने कहा, कतई ऐसा कभी मत करना। आपके पास है तो सहयोग दो, नहीं तो कोई बात नहीं, जब होगा तब करना; लेकिन कर्ज लेकर मत भेजो। पहले अपनी सुविधा, अपनी जरूरत, अपने परिवार की जिम्मेदारी देखो; उसके बाद अपनी योग्यता के अनुसार और सामने वाले की जरूरत के अनुसार करो। हां, पीछा मत छुड़ाओ। जहां भी रहो, पूरी तरह रहो; जिसके साथ रहो, पूरी तरह रहो।

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