आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0128 · भाग 18

गुरु जी, आपकी और हमारी मनःस्थिति अब बहुत अलग है — जैसे नदी को क्या पता सूखा कैसा लगता है। क्या आप कभी हमारी जैसी स्थिति में थे, और क्या वह याद है? क्या आप हमारी स्थिति को महसूस कर सकते हैं?

हां, अभी भी याद है, तभी तो जवाब दे रहे हैं — उससे मैं भी आया हूं, पूरी तरह और अच्छे तरीके से याद है। जब मैंने प्रश्न पूछे थे तो मेरे साथ बहुत दुर्व्यवहार हुआ, अपमान हुआ। उसी समय मैंने पक्का किया था कि जिस दिन मुझे ज्ञान होगा, मैं घूम-घूमकर बांटूंगा — लोग मुझे नहीं ढूंढेंगे, मैं लोगों को ढूंढूंगा। बिना मतलब का अपमान सहना बहुत मानसिक दुख देता है; मैंने वह पीड़ा खूब झेली, तो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को उससे बचा सकता हूं — कि एक प्रश्न पूछने पर उन्हें प्यार से उत्तर मिले, फटकार नहीं। इसलिए मैं खुद लोगों से मिलता हूं; यहां वीवीआईपी-वीआईपी नहीं चलता, किसी का बैकग्राउंड काम नहीं करता। लोगों ने अध्यात्म का जो रहस्य बनाया है, सब खोल दूंगा — ताकि जिसे लोग गंवार समझते हैं वह भी सीना ठोककर कहे कि मैं भी मोक्ष तक पहुंचूंगा। इसका अधिकार हर व्यक्ति को है।

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वीडियो: जब मैं छोटे दायरे को तोड़ा ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-12-22