आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P18-0052 · भाग 18

गुरु जी, अगर इस जाल से निकलकर सच बोलें, तो अपने ही लोग कहते हैं "पहले अच्छे थे", घर वाले कहते हैं इतना सच मत बोलो, ऑफिस में कहते हैं इस विषय में सच मत बोलना — तब क्या करें?

मेरे समझ से आज तक आपको किसी ने सीधे बेईमानी की क्लास नहीं दी — धीरे-धीरे सिखाया गया। बचपन में किसी के खेत से गन्ने तोड़कर लाने को कहा, तब पता नहीं था तो बेईमान वह था जिसने भेजा; लेकिन जब पता चल गया, तब फिर क्यों लाए, क्यों आदत डाल ली? फोन आया, सामने वाले ने कहा "बोल दो कि अभी नहीं है" — उसने झूठ बोलने को कहा और आपने बोल दिया। ऑफिस वाले कहते हैं सच मत बोलना — ठीक है, तो फिर अपने आप को आध्यात्मिक मत बोलो; बेईमानी करो तो सीना ठोककर करो कि मैं बेईमान हूं, फिर भोगो। यह मजा छोड़ नहीं रहे — लगता है जब तक बेईमानी और लल्लो-चप्पो की बात न करें, रस ही नहीं आता, दिन नहीं बीतता। अगर आप करना चाहें तो बहुत सीधी और आराम की यात्रा है।

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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03