प्रश्नोत्तर P18-0048 · भाग 18
गुरु जी, बेईमानी क्या है — दूसरों के साथ और अपने साथ?
जब आप किसी की भावनाओं को बिना मतलब ठेस पहुंचाते हो, तो वह बेईमानी है; जब योग्यता से ज्यादा चाहिए, तो बेईमानी है। पूरी तरह बताएं तो कर्म करते हुए छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड — इनमें से एक भी करते हो तो बेईमानी है; यह दूसरों के साथ है। अपने साथ बेईमानी है — मान की इच्छा, योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा, दिखावा, और बड़ा-छोटा बनने की इच्छा। आप अपने आप को कुछ बनाना चाहते हो, जबकि आज तक कोई बन नहीं पाया; सम्मान के लिए पागल की तरह घूमते हो — जहां लायक हो वहां सम्मान मिले तो फर्क नहीं पड़ता, जहां लायक नहीं वहां मिले तो एकदम प्रसन्न हो जाते हो। इन चार चीजों का जिंदगी से त्याग करो — तभी कुछ होगा, नहीं तो नाम जप करो चाहे कुछ भी, भटकते रह जाओगे। जैसे मकड़ी दूसरों को फंसाने के लिए जाला बनाती है और आखिर में खुद उसी में खत्म हो जाती है, वैसे ही आपने खूब शब्द इकट्ठे कर लिए, पर उनमें जी नहीं रहे — मान और पैसे के लिए लोगों को सुनाते हो। इसलिए कैसे भी अपना आत्मिक कल्याण कर लो।
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वीडियो: आत्मज्ञान किस स्थिति में होता है ? #aadhyatmik_satsang #livesatsang #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2025-01-03