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प्रश्नोत्तर P18-0010 · भाग 18

गुरु जी, "अपनों की कुटिया" बनाने का भाव क्या है?

12 साल पूरे होने पर भाव हुआ कि कुटिया का निर्माण हो, जहां साधक के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था निःशुल्क हो। मैंने आश्रमों में बड़ी दुर्दशा देखी — जगह तभी मिलती है जब या तो आप बहुत पैसे वाले हो (तो AC रूम खुल जाएगा), या आश्रम की इतनी सेवा करो कि वे खुश हो जाएं। गुरु शिष्य के साथ नहीं, करोड़पति के साथ भोजन करता है; शिष्य भगवान ढूंढने गए थे और करोड़पतियों के बर्तन मांज रहे हैं; गरीब आए तो "महाराज जी साधना में हैं", अमीर रात 2 बजे आए तो दरवाजा खुल जाता है — यह शर्म की बात है। इसलिए ऐसी कुटिया बनाई जहां किसी का बैकग्राउंड काम नहीं करेगा, बस साधक रह सकते हैं, प्रेम होगा, और भोजन सात्विक व ईमानदारी का होगा। मेरा भाव हुआ कि अब ज्ञान से भी और तन से भी सेवा करूंगा — यह कार्य परमात्मा का है, मेरे पास करने को अब कुछ है नहीं, कोई इच्छा नहीं रही।

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वीडियो: योगीजी की आत्मकथा अज्ञान से ज्ञान तक खोज में कुछ अनुभव की बातें ! #yogijikasatsang #pratyakshgyan · 2024-08-25