प्रश्नोत्तर P17-0131 · भाग 17
गुरु जी, "मुझे तो कुछ नहीं चाहिए" — क्या यह कह देना ही काफी है?
(पहले समझ लो कि कहानी न सच होती है न झूठ, सिर्फ समझने के लिए होती है।) एक शिष्य गुरु से जिद करता रहा कि शक्तिपात कर दो, मुझे मुक्त कर दो, मुझे कुछ नहीं चाहिए। गुरु ने कहा अभी और साधना कर, तेरी स्थिति छोड़ने लायक नहीं बनी — तुझसे ज्यादा बेचैन तो मैं हूं। जिद पर गुरु ने हाथ रखा तो भीतर सब खत्म होने लगा, और वह चिल्लाया — छोड़ दो, मैं खत्म हो जाऊंगा — और छुड़ाकर भाग गया। "कुछ नहीं चाहिए" कह देना बड़ा आसान है और कहने में एक अलग ही मजा भी है; पर असली स्थिति तब पता चलती है जब मन का न हो, जब विपरीत परिस्थितियां आएं और व्यवस्था इधर-उधर हो।
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वीडियो: मूल से मेरा हटना कैसे हुआ ? रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2025-12-21