प्रश्नोत्तर P17-0107 · भाग 17
गुरु जी, संसार के लोगों से इतनी मार खा चुका हूं कि अब किसी में रस नहीं रहा। सारी दुनिया बेईमान लगती है — टीवी खोलो तो झगड़े, पॉलिटिक्स, भक्ति चैनलों पर भी कुंडली-पैसे का धंधा। क्या करूं?
सारे के सारे अलग-अलग तरीकों से एक-दूसरे को लूटने में लगे हैं — देखना यह है कि हम किसमें लगे हैं, हम भी तो कहीं लगे हैं। बस यह देखना है कि मैंने दूसरे को बेईमानी से नहीं लूटा, चाहे जैसे भी। अपने को किसी से कहना नहीं है, अपने को देख लेना है — मैं कहां लगा हूं और कहां लग जाऊं।
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वीडियो: अद्भुत सत्संग ईश्वरी कृपा एकाकार / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-09-21