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प्रश्नोत्तर P17-0013 · भाग 17

"तेरा क्या होगा?" — इस बात ने मुझे जैसे स्टैच्यू बना दिया। मैं तो रस लेने के लिए प्रपंच भरी दुनिया में गई और इतना रायता बिखेर दिया। अब ये डरावना सीन सामने है कि सच में मेरा क्या होगा। मैं ईमानदारी से इस पर काम करना चाहती हूं — कहां से शुरुआत करूं, क्या करूं कि मेरा पक्का इंश्योरेंस हो जाए?

भाई, तेरा क्या? क्या तू ये शरीर है? शरीर तो थोड़े दिन में छूट जाएगा, तब तेरा क्या होगा? क्योंकि तूने शरीर तक के लिए किया है। ये शरीर कोई खत्म नहीं करेगा तो निमित्त बनेगा, ये प्रकृति खुद खत्म कर देगी। तो तेरा क्या होगा? तूने अपने लिए क्या किया, बता? क्योंकि ये तेरा धन भी काम नहीं आएगा, कपड़े भी काम नहीं आएंगे, तेरी प्रॉपर्टी भी काम नहीं आएगी, लोग भी काम नहीं आएंगे। यहां इस दुनिया में तूने जितना किया, एक शरीर की सुरक्षा के लिए — और वो शरीर भी खत्म हो जाएगा। तू जब इस शरीर से निकलेगा, तब तू कहां जाएगा? अब इसके लिए — जितने लोगों से मोह है, जितने लोगों से मुझे चाहिए, राग-द्वेष — पहले वहां से निकलना पड़ेगा। क्योंकि आप जहां हो, जब वहां से हटोगे, जब केंद्र पे आओगे, तब पता चलेगा मैं कहां जाऊं। आप कहीं खड़े थे और बहुत आगे निकल गए, तो पहले वो सब छोड़ के केंद्र पे आना पड़ेगा; केंद्र पे आओगे तब जवाब मिलेगा कि मैं जाऊं कहां। तो अभी तो निकलने के लिए काम करो — मोह, आसक्ति, बंधन, राग-द्वेष, इच्छा, अपेक्षा और "मेरा" के भाव से।

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वीडियो: आखिर तेरा क्या होगा ? #योगी · 2026-01-11