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प्रश्नोत्तर P16-0139 · भाग 16

लोग कहते हैं कि अगर गुरु नहीं है, कंठी नहीं है, तो आप लाल-गेरुए कपड़े पहनकर नहीं निकल सकते। तो फिर क्या करूं? कपड़ों का क्या महत्व है?

जो पहनना है वह पहनो। लोग कहें कि पहनोगे तो पीट देंगे — तो पिटा जाना। इच्छाओं के लिए संसार में कितना पिटे हो? परमात्मा के लिए पहने हो तो उसके लिए पिट लेना; जूते तो संसार में खाकर निकले ही हो, क्या नया है। कपड़ा बस व्यवस्था जुटाने का एक माध्यम है — कि मुझे देखकर लोग व्यवस्था देंगे कि यह इस संप्रदाय के साधु हैं, इनकी व्यवस्था करो। इससे ज्यादा कुछ भी नहीं; कपड़े का मतलब इतना ही है कि सरलता से व्यवस्था मिल जाए। अब अपने को तो व्यवस्था छोड़नी है, व्यवस्था चाहिए नहीं। देखिए, आप यह वस्त्र पहने हो और मैं ये कपड़े पहने हूं — चलिए पानीपुरी की दुकान पर पानीपुरी खाते हैं: आपको अनेक बातें सुननी पड़ेंगी, मुझे कोई नहीं बोलेगा, क्योंकि बाबा पानीपुरी की दुकान पर बैठकर नहीं खा सकता, पिक्चर नहीं देख सकता, होटल में नहीं बैठ सकता — इस कपड़े के दायरे हैं। अब चलिए किसी गांव में: आपको लोग कहेंगे "आओ बाबा, चाय पियो, पानी पियो", व्यवस्था देंगे, सम्मान देंगे; मुझे कोई खड़ा भी नहीं करेगा, बोलेगा पागल है। यह है वस्त्र का महत्व। किस दायरे में रहना है, वह आपके ऊपर है।

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वीडियो: कुछ बातें कुछ यादें कुछ सत्संग / #बातें #यादें #सत्संग · 2024-01-14