आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P16-0113 · भाग 16

आप बोलते हो कि स्वभाव से जो निकलता है, पूर्णता से निकलता है, वह पहुंचता है। पर जैसे हम आए हैं, पहले तो अभाव में ही शुरुआत होती है — संसार में कुछ भी करते हैं तो ठोकरें लगती हैं, कुछ मिलता नहीं, तो अभाव में ही फिर हम इधर की ओर आते हैं?

देखना यह है कि क्या आप झगड़े हो रहे थे इस वजह से इस तरफ आए, या पैसे-धन की कमी थी इसलिए आए? आप आए किस लिए? क्या आप संपन्न थे? संपन्नता अपनी-अपनी होती है — कोई झोपड़ी में ही संपन्न हो, कोई महल में भी ना खुश हो। तो आप पूरी तरह संपन्न थे, लेकिन देखा कि इसमें तो कुछ नहीं है, आपने वहां जीवन का अंत देख लिया, और लगा कि इसके आगे क्या है — और आप खोज में निकल गए, तो ऐसा व्यक्ति पहुंच जाता है।

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वीडियो: ईमानदार तो सिर्फ ईमानदार #योगी · 2026-02-28