प्रश्नोत्तर P15-0115 · भाग 15
हमारी स्मृतियां, मतलब यादें — जो जानकारी हमने इकट्ठा की — वह कब संस्कार रूप में बाहर आती हैं?
जब आपके द्वारा उस पे काम होता है। जब व्यवहारिक जगत में आप उसको आदान-प्रदान में उतारते हो, तब वो संस्कार में आती है, आचरण में — जब आप मेरा में उसका आदान-प्रदान करते हो। स्मृतियां कहां से हैं? मेरा से। यादें व्यक्तिगत आपकी नहीं हैं। आपके पास देखा जाए तो कुछ भी नहीं है; जितना भी है, बाहर से आपने लिया। तो बाहर से लिया हुआ जब व्यवहारिक जगत में आप अपनाओगे तो वही संस्कार हो जाएगा, वैसा ही आप बनते जाओगे, वैसा आपका आचरण होने लगेगा। मेरा से लेना है, मेरा में उपयोग करना है। मतलब आपके पास कुछ है नहीं — आपने बाहर से लिया है और बाहर देना है। बस यही है।
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वीडियो: हमारी स्मृतियां कब संस्कार बनती हैं ?#प्रत्यक्षज्ञान #yogijikasatsang #साधना #आध्यात्म · 2026-08-11