प्रश्नोत्तर P14-0200 · भाग 14
ईमानदारी और सत्कर्म से आत्म-शांति तो आ ही जाएगी प्रभु?
वो तो शुरुआत में आ ही जाती है, धीरे-धीरे वो आपको आत्मज्ञान तक पहुँचा देगी। अगर बहुत तेज रफ्तार से सत्कर्म करने लगे तो ये बहुत तेज होता है — तन से, धन से, ज्ञान से। और ध्यान में कुछ मिलने लगे तो मिलने में कभी मत जाना, नहीं तो वहीं फँस जाओगे।
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वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18