आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P14-0126 · भाग 14

कर्ता और अकर्ता में भेद क्या है? कर्ता तो हमें दिखाई देता है, अकर्ता होने के लिए हमें क्या करना है?

कर्ता को तो जानना है, अकर्ता को हम जानते नहीं। कर्ता से मुक्त होने के लिए सीधा-सीधा समझो तो अनुमान लगाना छोड़ दो। कर्ता होने के बाद भी कभी-कभी अकर्ता का भाव हो जाता है। जैसे किसी ने आपसे रास्ता पूछा और आपने बताया, उस समय कर्ता का भाव कहाँ रहता है? कोई अचानक गिर गया और आपने जाकर उठाया, उस समय अहम भाव काम नहीं करता। जब आप प्लानिंग से कोई काम करते हो और उसमें अनुमान लगाते हो, जैसे ही आपने समय निश्चित किया कि इतने समय में हो जाएगा, कर्ता का भाव प्रकट हो जाता है। कोई भी काम करो, परिणाम का और समय का अनुमान मत लगाओ, क्योंकि ना आपको परिणाम का पता है, ना समय का। जैसे किसान ने फसल बोई, गाँव वाले पूछते हैं कितना क्विंटल होगा। मात्रा बता दी और उतना हुआ तो कॉलर टाइट करके घूमेगा, कम हुआ तो छिपता फिरेगा। जो कहता है परिणाम आएगा तो देख लेंगे, उसे ना सुख होता ना दुख। अपने मैं को बनाए रखने के लिए लोग अनुमान लगाते हैं, इसे कहते हैं तुक्का मारना। पता है तो बताओ, नहीं तो बोल दो परिणाम आएगा तो बता दूँगा।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: कर्ता कौन है, अकर्ता कौन है ?| Who is the Doer ? Who is the Non-Doer ? #yogijikasatsang · 2026-05-18