प्रश्नोत्तर P12-0148 · भाग 12
हम बोलते हैं कि हमारे कर्म निर्धारित होते हैं — जो भगवान ने लिखा है वही होगा, हमारे हाथ में कुछ नहीं, चाहे दुख हो या सुख। तो क्या कर्म पहले से ही निर्धारित होते हैं?
मान लीजिए आपने एक महीना काम किया और पगार एक महीने बाद मिली, तो आपके ही कर्म की मिली ना? दे रहा है मालिक, लेकिन आपके कर्म से; जिसने कम किया उसे कम मिला। तो ये निर्धारित किसने किया? आपने। अतीत में हमने किया, वर्तमान में मिल रहा है; और वर्तमान में करेंगे तो आगे मिलेगा। देने वाला मालिक दिखता है, पर निर्णय करने वाले तुम ही हो — जितना काम किया उसके हकदार हो, उसे देना ही पड़ेगा, चाहे वो चाहे या ना चाहे; और काम नहीं किया, तो कितना भी रोओ, गिड़गिड़ाओ, पेमेंट नहीं मिलेगा। आपके हाथ में सब कुछ है — जैसा कर्म करते हो, वैसा आपको धन, तन, ज्ञान मिलता है; आता कहीं और से है, पर मिलता आपके कर्म से है। इसलिए मूल कर्म है, कर्म पर ध्यान दो। कर्म के पहले और बाद भाव बनता है, भाव से फल का निर्णय होता है; और किस भाव से कौन सा कर्म कर रहे हो, यह आपको पता है और परम सत्ता को पता है — यह सिद्ध नहीं किया जा सकता। कर्ता भी तुम ही, धर्ता भी तुम ही; जो भी हो रहा है उसका जिम्मेदार एक ही व्यक्ति है — स्वयं तुम। जिस लायक जो है, उसे वो मिल रहा है।
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वीडियो: क्या किसी के आशीर्वाद से कुछ होता है ? #योगी · 2026-07-03