आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P11-0155 · भाग 11

मैंने मान लिया, जान लिया कि मैं दृष्टा हूं, फिर भी आत्मज्ञान जैसा कुछ नहीं हुआ। बात समझ नहीं आई।

मैं यहां बैठकर मान लूं कि मैं राजा हूं, तो क्या राजा हो गया? राजा के लिए योग्यता चाहिए, राजगद्दी चाहिए, प्रजा चाहिए। यह गुड्डा-गुड्डी का खेल छोड़ो। आपने दृष्टापन का भाव लाया है, दृष्टा स्थिति थोड़ी ना हुई है — उसमें आओ। राजा का भाव बनाने और राजा जैसे कपड़े पहन लेने से राजा थोड़ी ना हो जाओगे। कोई अपने आप को परमात्मा मान रहा है, कोई ब्रह्म, कोई कहता है मुझे आत्मज्ञान हो गया — ये सब भ्रांतियां मत लो। जब आप उस स्थिति में आएंगे, तो आनंदमय हो जाएंगे; किसी से पूछोगे नहीं कि दृष्टा हो गया, अब क्या करूं। कल्पनाओं में मत जियो, कल्पनाएं बहुत नीचे गिरा देती हैं; प्रत्यक्ष में आओ।

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वीडियो: 11 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-11