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प्रश्नोत्तर P11-0058 · भाग 11

एक तरफ मेरे कुकर्मों का इतना बोझ है कि चाहती हूं कोई इसे हटा दे; दूसरी तरफ कहीं ना कहीं मैं रसपान भी दोबारा चाहती हूं। मैं इतनी शातिर हो गई हूं कि आपको भी घुमा देती हूं। सच्चा वैराग्य मुझमें कैसे आए?

(आपने) सब कुछ नहीं रखा; उतना ही रखा जितने में अच्छे दिख सको — सब कुछ रख देते तो घुटन भी नहीं रहती। एक बार अपनी समझ से ज्ञान को समझ लिया और ज्ञान को, और जहां से ज्ञान निकल रहा है उस परमात्मा को समर्पण कर दिया, तो फिर रसपान की बातें खत्म; अब क्या होगा, वह जानेगा। भागो मत; वह जैसा बता रहा है, वैसा करते जाओ, उसमें जियो, पलायन मत करो। अगर आप उतना ही कर रहे हो जितना वह कह रहा है, तो पूरी जिम्मेदारी उसकी हो जाएगी; और अगर विपरीत कर रहे हो, तो दंड के अधिकारी आप हो, और जिसके लिए आए हो वह होगा भी नहीं। आप दो तरफ चलना चाहते हो — वह भी ना छूटे और यह भी मिल जाए — यह नहीं हो सकता; आपको उसमें पूरी तरह जीना पड़ेगा, पूरी तरह नियम में रहना पड़ेगा। समर्पण के बाद (संशय भरे) प्रश्न नहीं उठते।

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वीडियो: 18 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी #योगी · 2026-01-18