प्रश्नोत्तर P10-0142 · भाग 10
गुरु जी, आपको पास्ट (अतीत) छूता क्यों नहीं?
क्योंकि पास्ट में मैंने जिया। मैं जी के निकला हूं, तो छुएगा कैसे? आधा-अधूरा छोड़ के निकलता, तो फिर छूता, मुझे पकड़ता। मैं जहां भी था, पूरी तरह जिया, और जी के निकला हूं, तो वापस जाने की बात ही नहीं है। किताब के अगर पूरे पन्ने पढ़ लिए तो किताब दोबारा उठाने की जरूरत नहीं है; लेकिन एक पन्ना भी छूट गया तो हो सकता है 20 साल बाद भी वह किताब पढ़नी पड़े। मेरे लिए ना कुछ अच्छा था, ना बुरा; मैं जहां भी था, पूरी तरह जिया। इसलिए मुझे अतीत कभी खींचता नहीं। और भविष्य की मुझे चिंता नहीं, क्योंकि मैं जहां होता हूं, पूरी तरह जीता हूं; मेरे जीने में ही तो सब कुछ है।
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