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प्रश्नोत्तर P10-0091 · भाग 10

गुरु जी, मेरा भाव है कि दृश्यमान जगत मशीन की भांति काम करता है, हमारे कर्मों का फल हम तक पहुंचता है और मैं इसमें फंसा हुआ हूं। अब मैं यह समझना चाहता हूं कि जिनके साथ मैं कर्म कर रहा हूं, क्या वे भी फंसे हुए हैं?

आप देख लो कि आप फंसे हो या नहीं, वो देखना है। वो फंसे हैं या नहीं फंसे हैं, उससे मुझे क्या मतलब? मैं फंसा हूं या नहीं, मुझे यह देखना है। उनके बीच में मैं अकेला फंसा हूं, यह मुझे मतलब नहीं है। मैं फंसा हूं ना, बात खत्म।

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