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प्रश्नोत्तर P10-0045 · भाग 10

आश्रम में रहने वाले के लिए क्या नियम है, महाराज जी?

नियम तो बता दिया है। आने वाले साधक और अभी के साधक सुन लें। यहां का नियम ही साधना है। नियम में रहना ही साधना है। सुबह 4 बजे या उसके बाद उठ जाना है। नित्य कर्म कर लेना है। शौच कर लेना है। स्नान कर लेना है। अपने आत्मिक चिंतन में बैठ जाना है। 8 बजे तक, आखिरी सुबह में, हॉल का गेट लगा दिया जाएगा। उसके बाद काढ़ा मिल जाएगा। नाश्ता करके सत्संग सुनना है। सत्संग में बैठना अनिवार्य होगा। फिर एकांत में जाकर बैठना है। सुबह 8 बजे हॉल बंद किया जाएगा, लॉक किया जाएगा, और शाम को 8 बजे ही खुलेगा। मैं व्यवस्था इसलिए कर रहा हूं कि लोग जाकर लेटे रहते हैं और उनका समय बर्बाद होता है। मैं किसी को बर्बाद होते हुए देख नहीं सकता। मैं जब तक अपनों की कुटिया में रहूंगा, मेरा शरीर रहेगा, तब तक मैं आप लोगों के लिए काम करूंगा। जिस तरीके से आप सध जाओ, जिस तरीके से आपकी साधना हो, उसके लिए मुझे कुछ भी करना पड़े, मैं करने के लिए तैयार रहूंगा। कुटिया में लॉक है। 8 बजे सुबह लॉक हो जाता है और शाम को 8 बजे खुलेगा। आप बाहर रह के साधना करें। काढ़ा, नाश्ता, भोजन बाहर लें। साधना करें। फिर 8 बजे विश्राम कक्ष में आ जाएं। सुबह 4 बजे के बाद उठें, और 8 बजे बंद हो जाएगा। आपस में बातचीत नहीं कर सकते। मोबाइल स्विच ऑफ हो जाता है। यह साधक आराम से बैठा हुआ है।

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वीडियो: Narmade Har Live: Q&A for You #Yogi · 2026-08-10