प्रश्नोत्तर P9-0198 · भाग 9
यदि ईमानदारी प्राकृतिक है तो सब में होनी चाहिए, जैसे रोना और हंसना। फिर ईमानदारी क्यों सिखाई जाती है?
इसलिए कि जब आप कर्म कर रहे थे तो ईमानदारी आपका स्वभाव था, कर्म में। बेईमानी आप लालच में आकर, मान में किए। और हंसना या रोना, जब ऐसी घटना घटती है तब आप हंसते हो या रोते हो। या तो घटना नहीं है आपके सामने, तो आप उस परम आनंद में रहोगे, अगर कुछ नहीं है। और अगर हंस रहे हो या रो रहे हो तो इसका मतलब आपके सामने कोई घटना है। ऐसे आप हंस-रो नहीं सकते। अगर आप ऐसे हंसना या रोना चाहो तो नहीं। बिना कारण के न हंस सकते हो, न रो सकते हो। तो प्राकृतिक है।
जब आप कर्म करते हो, ईमानदारी प्रकृति है। आपने बेईमानी कर ली है, इसलिए आपको ईमानदारी सिखाई जा रही है। अगर आपने बेईमानी नहीं की होती तो आपको ईमानदारी सिखाने की कोई आवश्यकता थी ही नहीं। वह तो हो रहा था।
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वीडियो: लाइव सत्संग अपनों की कुटिया में प्रश्न और उत्तर #योगी · 2026-07-16