प्रश्नोत्तर P9-0125 · भाग 9
गुरु जी, कर्म के सिद्धांत को थोड़ा सा विस्तार रूप देकर समझाइए। सुबह कह दिया था, कल बताएंगे।
अब बताओ। विस्तार से पूछते हो। अब बताओ। दो घंटा के ऊपर हो गया। अब विस्तार से बता। मतलब भुररिया हो जाए। और फिर यह। कुछ देर बाद यह कही है, कि सेवा के बारे में विस्तार से बतावत। तो दोपहरिया हो जाए। हां। तो फिर तू और पूछ ले। शाम हो जाए। और फिर एक बाद। हम कुर्सी से सीधा नीचे गिर गए। फिर यह सब। अपनी कुर्सी उठा के ले चला जाए। और हम सो पड़े रहें न। जैसे वह कुत्ता सोया है। शरीर गिर जाएगा न। क्या होगा। तो जैसे वह सब सोया है न। वही लेटा मिल। तब कहे कि यार, महाराज जी, देखो कितने त्यागी हैं। देख, लेटा है। तो महाराज जी जान, कितना त्यागी है। कांटे पर सोने वाला ही उस दर्द को समझता है।
लेकिन क्या करें। मान की इच्छा, पैसे की इच्छा इतनी प्रबल है, कि यार, कांटे पर सोने से पैसा मिलेगा। सो ही जाते हैं। जैसे देखो न। शर्त। शर्त में बचपन में कुछ भी कर देते थे। हमने उस दिन बताया न। दो सौ का शर्त लगा। और एक मुट्ठी मिर्ची खाई। अब अपनी बचपना। अभी उस दिन आपसे बताया था, कि एक मुट्ठी मिर्ची खाना। वह भी एकदम तीखी वाली। तो ऐसे थोड़ी क्यों दे। दो सौ रुपये में एक मुट्ठी मिर्ची का। हम कहा, खा ले। दो सौ की बात नहीं थी। एक बताना था। उस मिर्ची के द्वारा, कि मैं बलवान हूं। मुंह में पूरा साथ खाए। एक-एक के। पूरा खा के। और कुछ लगे। तीखा लगता। एकदम न। तीत लगता। वह तो हम ही जानते हैं। कि अगर मौका मिले, तो कपार पटक दो। मौका मिले तो। लेकिन आंखों में आंसू। लेकिन मुस्कुराहट। जबरदस्ती। अगर वह रूम से निकल जाते, तो हम माथा पटक देते। लेकिन मिर्ची खा गए। दो सौ ले लिए। और कह दिए, देख। वह तो हमें पता है, कि कितने घंटे तक हमारी हालत खराब थी। और खा के घोंटना पड़ा। सामने। आंखों से आंसू। लेकिन हमको तीखा नहीं लग रहा है। वह तो हमें ही पता है न।
तो यह कांटे पर सोने वाले। बारह साल से जैसे करे। अरे, वह प्रभाव के चक्कर में आ गया। समाज के चक्कर में। एक प्रभाव के चक्कर में। नहीं तो वह हाथ उठाए। सड़ जाता। पांव सड़ जाता। लेकिन समाज क्या करेगा। जब आप विपरीत काम करोगे न। अपने शरीर को तकलीफ दोगे, तो लोग उस प्रभाव में आपको धन देंगे। और आपके का कहेंगे, क्या बात है तुम। क्योंकि वह नहीं कर सकते न। वह नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें करना भी नहीं है। समझे। हाथ उठावत। आ। चढ़ावत। अब देखो, तू का करत है।
और हो सकता है, हाथ आत्मिक कल्याण के लिए उठाया हो। कुछ भी हो सकता है। मतलब हम तो बातें कर रहे हैं। हम किसी के बारे में कुछ कह नहीं सकते, कि वह हाथ क्यों उठाया है, पैर क्यों सड़ा रहा है। हो सकता है कि भाई, हमारा भी सड़ रहा था। कभी हमारा भी पांव सड़ जाते थे। इतनी सूजन हो जाती थी। जंघे में इतने छेद हो जाते थे। तो अब हम अपने आत्मिक कल्याण के लिए, ज्ञान की खोज के लिए। तो वह हाथ उठाने वाला, सड़ाने वाला ही समझ सकता है। लेकिन वह अपने भक्ति का प्रदर्शन नहीं करता है। वह जब भी करता है, तो एकांत में करता है।
समझ गए। अब इसी बात के साथ नर्मदे हर। करी। कुछ विस्तार से पूछ। हां। नहीं पूछे। ठीक है। मां।
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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06