प्रश्नोत्तर P9-0114 · भाग 9
क्या वैराग्य भी वैभव और दिखावा है?
हो सकता है। ऐसा कुछ नहीं है। कुछ न पाना, कुछ न चाहना, कुछ न होना, कुछ न पूछना। खाली-खाली। यह तो आखिरी में, जब वह जाता है न, तब पता चलता है वह क्या है। क्योंकि जब तक वह रहता है मेरे ऊपर, मैं संशय में जी रहा हूं। तो उस पर संशय ही करता रहूंगा। वह कितना भी वह बोले, कि मैं समाज के लिए कर रहा हूं, कर रहा हूं। जब वह जाता है। जब वह जाता है, क्योंकि अब वह कर नहीं सकता। और पिछला जब मैं देखता हूं, कि यार, इसने तो सब सेवा ही की। तब लगता है कि वह कुछ था। वह जब तक रहता है न, उस पर संशय ही रहता है। कि आश्रम बना रहा है। अपने लिए गाड़ी ले रहा है। ऐसे घूम रहा है। उसे। वह जब जाता है न, तब पता चलता है कि जितना उसके पास था, उसने किया क्या। क्योंकि तुम संशय में हो, तो तुम उसके ऊपर भी संशय करोगे।
मेरा तो कहना है, बस लाभ लो। संशय मत करो। आप सिर्फ लाभ लो। जिस काम के लिए आए हो, वह करो। वह तो आखिरी में पता चलेगा न। वह आखिरी में पता चलेगा। वह जाने के बाद, कि उसने क्या किया। क्योंकि बीच में कुछ भी कर सकता है न। एक व्यक्ति अगर नौकरी कर रहा है, तो बेईमानी तो आखिरी दिन भी कर सकता है न। जिस दिन वह रिटायर हुआ, उस दिन फाइनल हो गया, कि इसने अपनी नौकरी में बेईमानी नहीं की। हो सकता है वह आखिरी दिन कर दे। बाद में भी खुल जाती है। जब तक वह मरता नहीं, जब तक तो रिकॉर्ड। वह तो खुल जाता। वह तो देखो। अगर उसने किया है।
मैं कह रहा हूं कि उस व्यक्ति की बात कर रहा हूं, जो उस पद पर है। उसे ईमानदारी-बेईमानी उसके हाथ में है। तो यह तो आखिरी दिन पता चलेगा, कि वह क्या करके गया। क्योंकि आखिरी दिन तक संभावना तो बनी है। उसके हाथ में पावर है। आखिरी दिन तक भी संभावना बनी है। आखिरी दिन भी, रिटायर के पहले, कुछ कर ही सकता है न। तो आखिरी दिन पता चलता है। जब वह व्यक्ति चला जाता है, तब पता चलता है कि इसने क्या किया। क्योंकि आखिरी दिन तक भी संभावनाएं रहती हैं। इसीलिए लोगों को संशय बना रहता है।
तो मेरा तो यह कहना है कि छोड़ो यह सब बातें। आप जिस उपदेश को ले गए हो, उस पर काम करो। बस बात खत्म। क्योंकि उसका तो पता आखिरी दिन चलेगा, कि इसने क्या किया। हो कि न। उससे पहले वह जांचने वाला ही चला जाए। उसका तो टाइम वेस्ट हो जाएगा। यह भी तो हो सकता है न। कुछ भी हो सकता है। इसीलिए मैं जिस काम को ले के गया हूं, वह करूं। क्योंकि लोग मेरे भरोसे पर धन दे रहे हैं। तो मुझसे कोई हिसाब थोड़ी। वह धन कहां लगाता हूं, मुझे मालूम है न। कोई हिसाब थोड़ी नहीं ले रहा है। पूरे इंटरनेशनल पैसे आते हैं। तो वह तो मुझे पता है न, मैं कहां लगा रहा हूं। हम उन्हें थोड़ी हिसाब दे रहे हैं। वह हिसाब सिर्फ मेरे पास है। किसके पास? मेरे पास। और मेरे साथ रहने वालों के पास। क्योंकि जो आसपास रहते हैं, उन्हें तो पता ही चल जाता है न, कि यह धन का उपयोग कहां कर रहे हैं। उन्हें पता चल जाता है। है न। तो एक मुझे पता है। मेरे आसपास वाले लोगों को पता है, कि मैं पैसे का क्या करता हूं। और वह आखिरी दिन, जब वह निकलेगा, तब पता चलेगा।
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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06