प्रश्नोत्तर P9-0111 · भाग 9
आप भी फटे कपड़े पहनते थे, क्या दिखाने के लिए?
एकदम फटे कपड़े पहनते नहीं थे। जब हम कपड़े पहनते थे, तो वह धीरे-धीरे फटता था। तो फटे कपड़े तक हम इसलिए रहते थे, कि जब मैं फटे कपड़े में रहूंगा, तो समाज के लोग मुझसे खुल के बात करेंगे। इसलिए कि जब आप बाहर के आवरण से जितने मजबूत होते हो, उसी तरीके से समाज आपको भाव देता है।
मैं कह रहा हूं, एक करोड़पति आदमी हो, और एक रोडपति आदमी हो, भिखमंगा। एक को आप फोर व्हीलर गाड़ी में, अच्छे कपड़े, एकदम बढ़िया पहनाकर, और एक अनजान गांव में दोनों को भेज दो। और एक को एकदम फटे कपड़े। तो जिसके पास फटे कपड़े हैं न, समाज उनके साथ खुलकर बर्ताव करेगा। जैसा वह रहेगा। बचा हुआ भोजन देगा। बची हुई बातें करेगा। फालतू बोलेगा। अपना गुस्सा निकालेगा। भड़ास निकालेगा। लेकिन वह करोड़पति आदमी, वह गाड़ी से उतरा, उसको लोग सोचेंगे, हमारे दरवाजे पर चाय पी ले। हमारे दरवाजे पर नाश्ता कर ले। हमसे कुछ बात कर ले। समझ रहे हो। तो फटे कपड़े मैं इसलिए। वह मेरे काम का ड्रेस था। क्योंकि समाज को जब समझोगे आप, तभी समाज के लिए काम कर पाओगे। तो मैं नीचे से ले ऊपर तक लोगों को समझना चाह रहा था। तो नीचे वाले मेरे कपड़े देख के मुझसे खुल के बात करते थे। खुल के जलील करते थे। और ऊंचे लोग मेरे ज्ञान को सुनकर मुझे अच्छे से सुनते थे। तो मुझे दोनों मेरे पास आते थे। और खुल कर आते थे। खोल कर आते थे।
क्योंकि जब मैं बोलता था, तो गांव के जितने रहीस लोग हैं, उन्हें कपकपी हो जाती थी। रोने लगते थे। रहीस मतलब समझ का रहीस। रहीस मतलब यह मत समझ लेना कि धन का रहीस। हो सकता है धन का रहीस दरिद्र हो। समझ का रहीस।
तो मैं अभी मैं आपको बताता हूं। मैं फटाक पड़ा। यहीं खलघाट के पास। यह टाका खल गांव है। यहीं चिचली के बगल में। उस गांव से मैं आता-जाता था। एक ने मेरे को रोक दिया। ए, रुको। तो मैंने कहा, बोलो। तुम कौन हो? मतलब मैं कौन हूं? यह तो मैं लोगों को बताता हूं। मैं कौन हूं। इससे अच्छा है, तुम कौन हो, यह जानो। नहीं, नहीं, तुम कुछ हो। तुम क्या हो, पहले यह बताओ। और यह इधर रोज आते-जाते हो। इतने फटे कपड़े हो। कहीं जुड़े हो तुम किसी से। क्या बताऊं अब तुम्हें। अगर मैं बताऊं, तो तुम ऐसे बैठ नहीं पाओगे। तब थोड़ा और गुस्सा हुआ। हम कहे, अगर मैं बताऊं, तो तुम ऐसे बैठे हो न, बैठ भी नहीं पाओगे। बताओ, तुम कौन हो। गुस्से से बोला। बोला, अब आप इतनी जिद कर रहे हो, तो बता ही दूं मैं कौन हूं। क्योंकि अगर नहीं बताऊंगा, यह तो तुम्हारी जिद है। बोले, जाने ही नहीं दूंगा। हम कहे, अब बताना पड़ेगा। हम खड़े थे रोड पर। और हम बताने लगे। बताने लगे। तो वह सीधा हाथ ऐसे जोड़ा है। और ऐसे यह घुटना ऐसे हो गया। और उसकी आंखों में छरछर से आंसू आने लगे। रोने लगा। तुरंत रोने लगा। बोला, मैं यही हूं। अब बताओ। बोले, अब रुको। आज तो मत जाना। आज मत जाना। तो फिर मुझे उस मंदिर में मैं रुका। भोजन वगैरह किया। सत्संग सुनाया। रात को। उस समय वीडियो वगैरह नहीं बनते थे। शायद वीडियो नहीं बनते थे। तभी न वीडियो नहीं बना। सुनाया। और फिर बड़ा खुश हुआ। फिर उस गांव में मैं आने-जाने लगा। तो यह हाल है।
तो फटे कपड़े मैं इसलिए पहनता था, कि मैं समाज के लिए, मुझे काम करना था। मैं प्रत्यक्ष ज्ञान खोजा था। समाज के लिए खोजा था। तो मैंने कहा, जब इनके लिए काम करना है, तो मुझे नीचे से ले ऊपर तक लोगों को समझना पड़ेगा। अब कपड़े से कपड़े भारी हो जाएंगे, तो मेरे पास सिर्फ ऊपर वाले लोग आ जाएंगे। नीचे वाले छंट जाएंगे। तो मैं कपड़ा ऐसा पहनूं, कि मेरे नीचे वाले तो मुझे तुरंत, जैसे चाहे, वैसे बात करें। चाहे जैसा बर्ताव करें। और ऊंचे लोग थोड़ा शर्माते थे। तो ज्ञान से वह भी आने लगते थे। कपड़े से थोड़ा इतराते-कतराते थे, मेरे फटे कपड़े। लेकिन रोड पर करोड़पति भी मुझे सुनने। जब मैं आवाज, जब मैं बोलता था, तो लोग जुट जाते थे। अब उस रंक, राजा। गांव का एक झोपड़पट्टी वाला, और गांव का करोड़पति आदमी, क्या एक ही जगह खड़े रहते थे। मैंने कभी यह भी नहीं कहा कि तुम इन्हें आसन दो। क्योंकि मेरे पास कुछ था ही नहीं न। एक फटा हुआ कपड़ा। और मैं। और मेरा ज्ञान। तो मैं ज्ञान ही बांटता था। मैं उन्हें पानी भी नहीं पूछता था।
तो फटे कपड़े मैं इसलिए पहनता था। फट जाते थे। मैं फटा ले थोड़ी पहनता था। नया पहनता था। फट जाते थे। निकालता इसलिए नहीं था, कि मुझे काम करना था। तो मुझे समाज को समझना था। इसलिए मैं एकदम लो से लो क्वालिटी में समाज में कई सालों तक घूमा। कई सालों तक। क्योंकि जब आप जिसके लिए काम करोगे न, जब उसे समझोगे, तभी तो कर पाओगे। क्योंकि मुझे सबके, हर व्यक्ति तक आध्यात्म को पहुंचाना था।
अगर मेरे कपड़े ही पावरफुल होते, तो तुम यहां नहीं होते। तुम यहां नहीं बैठ पाते। मैं आपको बता रहा हूं। क्योंकि ज्ञान। अरे, जिसको बोलना नहीं आता, कचरे की तरह बोलते हैं, वह धर्म के नाम से झूठ बोलकर एयर कंडीशन में घूमते हैं। यह आपको भी पता है, मुझे भी पता है। जो झूठ बोलते हैं धर्म के नाम से। वह एयर कंडीशन में घूमते हैं। यहां तो ज्ञान है। जब मैं बोलता था, तो लोग थर्राते थे। कपकपी हो जाती थी। अगर मेरा कपड़ा मजबूत होता, अगर मैं बाहर से मजबूत कर लूं, तो तुम यहां नहीं बैठ पाओगे। लेकिन मैं चाहता था, मेरे पास हर व्यक्ति आए। तो करोड़पति मुझसे चोरी-चोरी मिलते थे। कहा, घर पर बुलवा ले। मैं जाता था। कोई बात नहीं। मुझे पता चलता था कि इन्हें शर्म आती है। क्योंकि वह। एक। सब। छोटा आदमी। उनके लिए छोटा-बड़ा तो है ही। वह निकले थोड़ी न है। तो मैं उनके घर पर बुलाया जाऊं। तो बोले, क्या-क्या सेवा करूं। मैं बोला, बस एक काम करो। यह सत्संग सुनो। इसमें चलो। फिर वीडियो खोल देता था। मैं बोला, यह देखो। बस यही सेवा है हमारी। और मुझे कुछ नहीं चाहिए। कपड़े ले लो। बोला, कपड़े की लाइन लगी है क्या।
क्योंकि क्या है। अपने-अपने कुछ पाने के लिए। लोग। कितने साल से। जितना पुराना कपड़ा, दो साल, तीन साल, उतना देने वाले। गांव का गांव, कपड़ा देने के लिए एक-एक आदमी। मैं पूछता था, कपड़े दोगे? कितने तक दोगे, बाबा? दस, बीस हजार। कितने का कपड़ा लोगे, बताओ। वह मुझे कपड़ा थोड़ी न दे रहा था। वह देख रहा था कि दो-तीन साल से एक व्यक्ति कपड़ा पहने। दो-दो, तीन-तीन, चार महीने निकालता नहीं था। तो उन्हें लगता था कि इनको अगर मैं कपड़ा पहना दिया, तो मेरा कल्याण, भौतिक जगत का, हो जाएगा। मैं आगे बढ़ जाऊंगा। मेरा वैभव हो जाएगा। मुझे थोड़ी न। उसे कपड़ा पहनाना था। उस कपड़े के द्वारा उसे कुछ बनना था। तो कपड़ा देने के लिए लाइन लगी रहती थी।
अगर मैं बाहर से मजबूत-मजबूत अगर करके काम करता न, तो तुम यहां नहीं होते। और न तो तुम्हें मैं सुनाता, कि मेरे पास पंद्रह लाख कर्ज है। तीन लाख का कर्ज है। मुझे यह सब सुनाना नहीं पड़ता। तुम्हें बताना नहीं पड़ता। तो यहां ढेरों लगे होते। मैं यहां से रात को कंपनियों के करोड़पतियों को रात को बारह बजे के बाद भगा देता था। अगर जरा सा इधर-उधर, नियम में नहीं रहते थे, तो रात को बारह के बाद। और आते ही कहते थे, मैं डोनेशन दूंगा। आप आश्रम। हम कहे, जिसके लिए आए, पहले वह करें। कि इतना जन, डोनेशन देने वाले। न। भगा ही नहीं था। उनको रात को बारह बजे भगा देता था। ऐसा नहीं कि वह करोड़पति थे। उनके आचरण गंदे। वह सोचें, हम करोड़पति हैं, तो मुझे अलग से कुछ व्यवस्था मिलेगी। अलग से कुछ चीजें मिलेंगी। तो मैं उन्हें भगा देता था।
तो मैं फटे कपड़े इसलिए पहनता था, कि वह समझ लो, मेरे काम का एक ड्रेस था।
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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06