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प्रश्नोत्तर P9-0100 · भाग 9

मैं काफी समय से, दो साल से या बीस साल से, वीडियो देख रहा हूं। अदृश्य रूप में लाभ हो रहा है। नाम अरुंध शाह है। तो क्या अब देना चाहिए, आपके काम में लगना चाहिए?

हमें नहीं पता, भाई। अपना कल्याण कर। तू कल से देखता हो, चाहे दो साल से देखता हो। बहुत जन तो मिले हैं। कुछ साल से। कहे, बीस साल से मिला है। तो हम। सामने वाला कहता है कि अरे, हम तो महाराज से बीस साल। हम ठीक हो। भाई, जानता है। अदृश्य रूप में जानता है। तो तू काल से देखता है, कि दो साल से देखता है। हमें ही न। मतलब हमें बस इतना मतलब है, कि तू कितना समझता है। वह तेरी समझ से। हमें उससे भी न मतलब। हमें अगर मतलब होए, तो यह पूछो, कि तू हमारे काम में कितना लगाया है। और ज्यादा, अपनी क्षमता से ज्यादा कहे, तो कह दे। हम कभी स्टेटमेंट दे। या तो नाम बताओ, जिस नाम से आए। अरुंध शाह के नाम से। अरुंध शाह। अच्छा। ऐसे लगाते रहे। भाई, सरकार में तो सरकार नहीं है। हमको वैसा हो रहा है। सब कुछ हो रहा है। वही हमें लाभ है। तो फिर हमें पे करना चाहिए। देना चाहिए। अगर मैंने लाभ लिया। क्योंकि अगर हर आदमी मुफ्त में खा के जाएगा, एक दिन वह खाली हो जाएगा। आप सोचिए कि आपके पास कुछ है। और हर आदमी, एक, महाराज जी, तपस्या। कहो, तपस्या। महाराज जी आए। समाज के लोग आए। महाराज जी, भला करो। जंतर पहना। सच में काम करता था। लेकिन यह तो दाढ़ी है न। तपस्या का एक-एक बाल। एक दिन उनकी डर। दाढ़ी न रही। फिर मूंछ पर गए। दाढ़ी-मूंछ दोनों खत्म हुईं। महाराज जी खाली। अब जा। फिर तपस्या कर। क्योंकि सामने वाला। अब जंतर पहने, तो थोड़ी न लौटे। जंतर लौटे का करें। लौटी है। तो एक दिन महाराज खाली हुए। तो जब आप अगर बस एक व्यक्ति से लेते रहोगे, तो वह व्यक्ति एक दिन खाली हो जाएगा। वह व्यक्ति एक दिन खाली हो जाएगा। तो जहां से मैं, जिस पेड़ का फल खा के मैं तृप्त हूं, उस पेड़ को मुझे पानी देना ही चाहिए। समझा? तो बीच में फोन करने के लिए सोचे, लेकिन डर सा लगने लगा। कि डरो मत। जब तो सेवा करे कोई, तब हल्का सा कार्य उसको। नहीं गया, कि नहीं गया। बात हल्की की नहीं। जैसी आपकी सामर्थ्य है, वैसा करो। बात हल्की नहीं होती है।

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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06