प्रश्नोत्तर P9-0088 · भाग 9
क्या ईमानदारी और सत्कर्म हमारा मूल आत्मिक स्वभाव है?
नहीं। स्वभाव बनाया गया है न। न आपका स्वभाव ईमानदारी का है, न आपका स्वभाव बेईमानी का है। आप इससे भी परे हो। बेईमानी से मुक्त होने के लिए ईमानदारी अपनानी पड़ रही है। एक समय ऐसा आएगा कि ईमानदारी भी छूट जाएगी। तब जाके अवधूत स्थिति होगी, और तब जाके आत्मज्ञान होगा।
एक समय ऐसा आएगा आपके जीवन में। जैसे आत्मज्ञानी न तो ईमानदार है, न बेईमान है। वह दोनों नहीं है। जब आप बेईमानी कर रहे हो, तो ईमानदारी की जरूरत है। अगर आप बेईमानी से मुक्त हो गए, तो ईमानदारी स्वतः खत्म हो गई। फिर आपके द्वारा कुछ भी हो रहा है, वह सत्कर्म हो रहा है। बस, ईमानदारी से भी आप छूट गए।
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वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06