आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P9-0075 · भाग 9

गुरु जी, आप संकल्प में बंधे हुए हैं, इसलिए ब्रह्म ज्ञान आपसे दूर है, और हम विकल्प में फंसे हुए हैं, इसलिए आत्मज्ञान से दूर हैं।

संकल्प हमने खुद लिया है। वह संकल्प कभी न कभी पूरा हो जाएगा। हम संकल्प में बंधे नहीं हैं। हमने अपने आप को बांधा है। अगर कोई किसी को बांधता है, तो वह दुखी है। आप विकल्प में हो, तो आप विकल्प में अपने स्वाभाविक नहीं हो। आप अपनी कामनाओं और वासनाओं के वशीभूत होकर विकल्प में लिप्त हो। कहने का मतलब, आप दुखी हो। मैंने अपने आप को संकल्प में बांधा है। मैं बंधा नहीं हूं। मुझे कोई बांध नहीं रहा। अगर मैंने अपने आप को कहीं बांधा, तो मैं खुश हूं, क्योंकि मैंने सोच-समझ कर ही बांधा होगा। अगर कोई आपको बांधता है, तो आप दुखी होते हो। आप विकल्प में फंसे हुए हो। विकल्प में ऐसा नहीं है कि आप स्वयं गए हो। आप कामनाओं में गए हो, वासनाओं में गए हो, लालच में गए हो। तो अपने आपको जल्दी से जल्दी छुड़ाना जरूरी है। और मेरा काम है कि मैं अपना संकल्प पूरा करूंगा। जितना मैंने संकल्प लिया है, चाहे जिस तरीके से पूरा करना पड़े, वह मुझे पूरा करके निकल जाना है। तो मेरे संकल्प में बंधन नहीं है, दुख नहीं है, अशांति नहीं है, पीड़ा नहीं है, क्योंकि मैं खुद अपने आप को बांधा हूं। पीड़ा तो तब होगी, जब आपको कोई बांधे और आप छुड़ाना चाहते हो, जबरदस्ती किसी ने बांध दिया हो। बहुत फर्क है, भैया। बहुत समझना है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: लाइव के प्रश्न और उत्तर अपना स्वयं का कल्याण कैसे करें ? #योगी · 2026-06-06