प्रश्नोत्तर P8-0015 · भाग 8
मेरा मुंबई में छोटा व्यापार है। कभी सामान कम दाम में लेकर ज्यादा दाम में बेचता हूं। आप कहते हैं ईमानदारी से कर्म करो। तो क्या कम में खरीदकर ज्यादा में बेचना बेईमानी है?
आप ज्यादा दाम में बेचिए। कम में लेना, बिजनेस का मतलब ही है। कम में लेना, ज्यादा में देना। आप जो माल बता रहे हो वो क्या है? बस क्वालिटी। आप जिस क्वालिटी को बताकर पैसा ले रहे हो, वो क्वालिटी है क्या?
अब जैसे कोई फुटपाथ में सौ रुपये का सामान, एक फुटपाथ वाला लाया, एक शोरूम वाला लाया। अब हो सकता है फुटपाथ वाला एक सौ बीस में ही बेच दे, सौ के ऊपर। लेकिन अब शोरूम वाला वही रेट थोड़ी ना बेचेगा। क्योंकि उसे शोरूम का भाड़ा भी देना है। फुटपाथ वाला अकेले धंधा कर रहा है। शोरूम वाला पूरा लाइट बिल है, वर्कर है, नौकर है। तो भाई वो ज्यादा दाम लेगा, उसी सामान का। एक ही सामान एक जगह कम में मिल रहा है, एक जगह ज्यादा मिल रहा है।
मेरा कहना यही है कि आप जो बता रहे हो, अगर वो क्वालिटी का माल है, कस्टमर को बेच रहे हो, उस क्वालिटी का वो पैसा दे रहा है। किसका पैसा दे रहा है? क्वालिटी का पैसा दे रहा है। और वो क्वालिटी है, तो आप ईमानदार हो। और वह क्वालिटी नहीं है, आप कम कीमत में भी बेच दिए, क्योंकि उसने क्वालिटी का पैसा दिया और वो क्वालिटी नहीं है, और आपने जितने में लिया उससे भी आधे दाम में बेच दिया, तो भी बेईमान हो। बात समझ में आ गई।
आप कितने का लाए, कितने का बेचते हो, वो तो आपके टैलेंट के ऊपर है ना। लेकिन वो क्वालिटी का पैसा दे रहा है। ये याद रखना। वो क्वालिटी का पैसा दे रहा है। जो क्वालिटी बता रहे हो, है? है तो ठीक है, ईमानदार हो। और पता चला वो क्वालिटी नहीं है, तो फिर आप बेईमान हो। बात खत्म। सीधी सी बात है।
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