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प्रश्नोत्तर P5-0187 · भाग 5

यहां व्यवस्था मिली फिर भी रुक नहीं पा रहा — कमी क्या है? पिछले जन्मों के कर्म या अभी कुछ खराब?

भाई, देख तो, अंदर तेरे अंदर है। कारण मेरे अंदर थोड़ी है। मेरे अंदर कारण है तो मुझे ही तो देखना पड़ेगा। अब कोई और देख के मेरे कारण का क्या करेगा? या तो गुरु बता सकते हैं, या मैं खुद देख सकता हूं। इसमें तो कोई कुछ नहीं कर सकता। इससे ज्यादा प्रत्यक्ष क्या हो सकता है? जैसा है, वैसा हमें मिल रहा है। उससे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता। वो तो हमारे ऊपर डिपेंड है, कि हम कितना पचा पाते हैं, हमारी कैपेबिलिटी कितनी है, हमारी पात्रता कितनी है। उसी के ऊपर डिपेंड है। मुझे ये देखना है, कि जिस मकसद से कार्य किया है, और जिस मकसद से मैं गया हूं, मैं कर रहा हूं या नहीं। मुझे भीड़ नहीं देखनी। पुराने लोग हैं कि नहीं हैं। पुराने लोगों को लेकर क्या करोगे, और नए लोगों को लेकर क्या करोगे? हमें तो ये देखना है, कि मैं जिस उपदेश से आया हूं, वो कार्य कर रहा हूं कि नहीं। हमसे क्या मतलब, पुराने लोग आएं चाहे ना आएं। क्या फर्क पड़ता है? हम तो इस व्यक्ति के लिए आए हैं। ये तो है। अगर ये चला गया होता, तब बात बनती, कि वो नहीं है इसलिए कुछ ऐसा हो रहा है। अगर आपको पुराने लोगों की याद सता रही है, इसका मतलब आप उसमें लिप्त हो गए हो। ये शब्द ही कहां से आया, कि पुराने लोग नहीं दिख रहे? अपने अलावा, और गुरु के अलावा, गुरु के शब्दों के अलावा, तीसरे की बात ही नहीं करनी। मुझे क्या मतलब पुराना-नया? अगर मैं कह रहा हूं कि पुराने लोग नहीं दिखे, इसका मतलब मेरी किसी न किसी से आसक्ति हो गई है। मैं पुराने लोगों को क्यों देखना चाहता हूं? नए लोगों को क्यों नहीं देखना चाहता, या नए लोगों को क्यों देखना चाहता हूं? मैं अपने कल्याण के लिए आया हूं। मैं हूं, वो है। मेरे लिए तो जिसके पास गया हूं, वो। उसके अलावा मेरी जिंदगी में कोई नहीं होना चाहिए। क्योंकि जितने लोग जिंदगी में थे, उन्हीं से तो मैं परेशान था। अब यहां भी आसक्ति मान लूं। पता चला कल बाबूलाल चला जाए, तो बाबूलाल चला गया। बाबूलाल के लिए मैं आया था? मैं तो इस व्यक्ति के लिए आया था। ये व्यक्ति शुरू से लेकर अभी तक है कि नहीं है? ये कहीं गया क्या? मैं भी तभी से हूं। यहां आया हूं शुरू से। तो ये तो है। आपके द्वारा बहुत लोगों को समझ मिलेगी। मेरे अंदर से ये कहां पैदा हुआ, कि पुराने लोग नहीं दिख रहे? कुछ एक-आध आदमी उस टाइम उस लायक नहीं होंगे, वो नहीं आए। जैसे इंदौर से वापस चला गया, तो इस लायक नहीं था, इसलिए नहीं आ पाया। उन्हीं के अंदर कमी है। ऐसे लोग ना आएं तो ठीक है। आगे क्या उतापात करेंगे? और आज देखो, संख्या पुराने लोगों की सबसे ज्यादा है। इसका जवाब प्रकृति ने दे दिया। पुराने लोगों को गले मिल लोगे? आज संख्या देखो, तो सबसे ज्यादा पुराने लोगों की संख्या है। आपसे पूछा गया था, यमुना के तट पर, हरियाणा में आश्रम बन रहा है, कैसा लग रहा है? तो आपने बात ही पलट दी। हमसे क्या पूछा जाता है, हम जवाब क्या देते हैं। यही हमारी गड़बड़ी है। जिस उपदेश से गए हैं, क्या मैं वो कर रहा हूं? मुझसे कुछ और पूछा जा रहा है, और मैं जवाब कुछ और दे रहा हूं। उस जवाब का क्या मतलब है? किसी ने पूछा, टिकट लेने गए, कहां जाना है? आपने किसी और स्टेशन का नाम बता दिया, उसने टिकट फाड़ दिया। फिर कह रहे हो, जाना तो यहां था। वो बोलेगा, नाम क्यों लिया? भरपाई मैं करूं? लेकिन आपकी ऊर्जा गई। आपका धन गया। रिटर्न भी करेगा तो कुछ काट ही लेगा। ऐसे बोलने में बहुत कुछ खो जाता है। वो पूछ रहा है कहां जाना है, और आपने कुछ और स्टेशन का नाम ले लिया। उसने तुरंत दे दिया। फिर आप कहो, यहां तो नहीं जाना, यहां जाना है। जब पूछा कहां जाना है, तो दूसरा स्टेशन का नाम क्यों लिया? स्टेशन बढ़िया है, उससे क्या हुआ? जीवन में इतना याद रखो। मुझसे क्या पूछा जा रहा है? उसका जवाब अगर मेरे पास है तो दे दूं। नहीं है तो बोल दूं, नहीं पता। दो में से एक बात। या तो जवाब मेरे पास है, या नहीं है। मैं दूसरी बात क्यों करूं? उसमें समय बर्बाद होगा। अगर यही आदत रही, तो हम हमेशा उल्टा-सीधा मांगते रहते हैं। जैसे कहानी है। शंकर भगवान का भक्त था। रोज नदी पार करके जाता था। गांव वालों ने रोका, फिर भी गया। शंकर भगवान प्रसन्न हो गए। बोले, क्या चाहिए? बोला, चूना तो ठीक है, लेकिन तंबाकू दे दो, गीला हो गया। क्या तंबाकू के लिए भक्ति कर रहा था? वैसे ही, मांगना भी आना चाहिए। समय पर जवाब देना आना चाहिए। आपका सवाल और उसका जवाब, यही आपको पहुंचाएगा। या आपका सवाल और उसका जवाब, तभी आगे बढ़ोगे। सवाल कुछ और और जवाब कुछ और, तो उसका कोई मतलब नहीं, कोई मीनिंग नहीं। अब पुराने लोग सबसे ज्यादा हैं। अब क्या करोगे? गले मिलोगे?

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23