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प्रश्नोत्तर P5-0139 · भाग 5

सेवा भाव के साथ चिंतन जरूरी है क्या? आंख बंद आत्मचिंतन या सेवा?

सेवा कर रहा है, उसी में आत्मचिंतन तो हो ही रहा है। अपने आप को छुड़ाने के लिए ही तो सेवा कर रहा है, तो वही तो आत्मचिंतन है। आप अपने आप को छुड़ाने के लिए क्या कर रहे हो, वही आत्मचिंतन है। इसी भ्रम में सभी लोग रहते हैं कि ऐसे बैठ जाओ, वही आत्मचिंतन है। तू सबका छोड़, अपना कल्याण कर ले और पूरी तरह अपने आप को आत्मिक चिंतन में लगा दे। आत्मिक चिंतन का मतलब है कि क्या करके मैं अपने आप को छुड़ा लूं, क्योंकि कुछ करके ही छूटूंगा। आत्मचिंतन की जगह सेवा ही करनी है। आत्मचिंतन क्या है, इसे जरा गहराई से समझो। चिंतन का मतलब होता है कि कुछ बिगड़ गया है, उस पर चिंतन हो रहा है कि इसे कैसे बनाया जाए। आत्मा जीवात्मा हो गई है; मैं अपनी आत्मा हूं, तो मैं कैसे छुड़ाऊं? जैसे कोई गुलाम बन गया है, तो सामने वाला कह रहा है कि भाई, इसकी भरपाई कर दो तो गुलामी छूट जाएगी। वह उसकी भरपाई कर देगा तो गुलामी से मुक्त हो जाएगा। गुलाम किसी कारणवश गुलाम बना है; उसने कुछ लिया है, उसकी भरपाई कर रहा है। तो आत्मचिंतन यह है कि मैं इस आत्मा को इस भवसागर से कैसे छुड़ाऊं, और छुड़ाने के लिए काम करना पड़ेगा। सेवा में अपने बंधन दिखते भी हैं और भरपाई भी साथ में होती है, दोनों काम होते हैं। आंखें बंद करके बैठने में केवल बंधन दिखते हैं, भरपाई कहां से होगी? तो सेवा श्रेष्ठ है, आत्मचिंतन यही है। आंखें खोल के क्या कर रहे हो, वही आत्मचिंतन है। सीधी सी बात, अगर आप एकदम सरल भाषा में देखोगे तो मैं गुलाम हूं, अपनी इच्छा-वासनाओं का गुलाम हूं, और अपनी गुलामी से मुक्त होना चाहता हूं। तो यह जो सेवा है, यह जो काम मैं दूसरों के लिए करता हूं, जिसमें ना मुझे कोई वेतन मिलेगा और ना वाहवाही मिलेगी, वही निष्काम कर्म है। उसे करके मैं अपनी स्थिति सुधारूंगा, और जब मैं भरपाई कर दूंगा तो गुलामी से मुक्त हो जाऊंगा। दो गुलाम हैं: एक गुलामी से मुक्त होने के लिए काम कर रहा है, एक बैठा है। जो काम कर रहा है वह मुक्त हो जाएगा, और जो बैठा है वह वहीं नहीं रहेगा, उसका ब्याज बढ़ता जाएगा। हर जगह ब्याज लगता है। पूरा परिवर्तनशील संसार है, यहां मूल एक जैसा रह ही नहीं सकता; मूल सिर्फ परम सत्ता है। आप यह मत सोचना कि केवल बाहरी ब्याज लगता है, प्रकृति में भी ब्याज देना पड़ता है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 16 अगस्त 2026 · 2026-08-16