प्रश्नोत्तर P5-0117 · भाग 5
आत्मज्ञान के बाद भी कर्म/पाप-पुण्य भोग बाकी रहता है क्या? ईमानदारी क्या है कैसे करें? साधना कैसे करें? योग्यता से अधिक का मतलब?
आत्मज्ञान कभी भी आप करवा सकते हो, गुरु कृपा से।
ईमानदारी क्या है, और कैसे करें। आप बस कर्म करते हुए इतना ध्यान रखिए कि छल, कपट, चोरी, बेईमानी, चापलूसी, मक्कारी, धूर्तता, पाखंड, यह ना हो। बस ईमानदारी होगी। आप यह मत करो।
साधना कैसे करें। साधना का मतलब होता है अपने आप को सुधारना। तो बिगड़ने वाला काम मत करो, यही है साधना। आप बिगड़ने वाला काम बंद कर दीजिए, यही है साधना।
योग्यता से अधिक का मतलब। आप दुकान पर गए, तो आपको सामान लेना है। पता है कितने का है। तो जितना जेब में पैसा हो, उतना लो। अगर योग्यता से ज्यादा चाहिए, जेब में पैसा कम है और सामान ज्यादा चाहिए, तो दुकानदार से फिर मिला-जुला के, मिलावटी बात करनी पड़ेगी। दुकानदार ने दिया तो कहोगे, दुकानदार बहुत अच्छा है, प्रचार करोगे। नहीं दिया, कहोगे बहुत बुरा है। और ना बुरा है, ना अच्छा है। दुकान खोल के बैठा है। पैसा दो, और सामान ले लो। लेकिन दुकानदार को भी आपने अच्छा-बुरा बना दिया। तो प्रकृति दुकान की तरह है। जैसा आप करते हो, वैसा आपको परिणाम मिलता है। और आप हो सेटिंग के चक्कर में।
सेटिंग के चक्कर में, मुक्ति चाहिए तो जुक्ति लगाना छोड़ दो। जुआ लगाना छोड़ दो। बस बात खत्म। जुआ ही तकलीफ देता है। आपको परेशान किया, आपका जीवन अशांत किया। जुआ ही है। आप हर जगह जुआ लगाते हो। यह छोड़ दो। जुआ लगाना, सेटिंग करना छोड़ दो। सेटिंग में राग-द्वेष पैदा होता है। सेटिंग हो गई तो राग, नहीं हुई तो द्वेष। बस सेटिंग करना छोड़ दो। और जब तक सेटिंग करोगे, ऐसे दौड़ते रह जाओगे। ऐसे दौड़ते ही रह जाओगे।
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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? · 2024-12-31