प्रश्नोत्तर P5-0068 · भाग 5
यहां धूपबत्ती, अगरबत्ती, मूर्ति, भजन स्पीकर कुछ नहीं — क्या सहायक नहीं हैं?
मूर्ति पूजा, शास्त्र, सब सहायक हैं। वह सब तो आप कर ही लिए हो। यह आखिरी यात्रा में बैठे हो। आपको पता है, जब रामकृष्ण परमहंस को तोतापुरी ज्ञान करवा रहे थे, तो बोले, काली मां का रूप भी छोड़। चीरा लगाया था, अंदर से उन्होंने रूप हटाया। यह आखिरी यात्रा है। माला जप ही लिए, भजन सुन ही लिए, मूर्ति पूजा कर ही लिए। और आपको यह भी पता है कि सहायक हैं, पहुंचाएंगे नहीं। आखिरी में गुरु वह सब छुड़वाएगा। अब आपने जितना किया है, वह मुझे छुड़ाना पड़ेगा, क्योंकि वह धारणा आपने बना ली है, वह नहीं छूटती। वह सहायक भी है। यहां तक पहुंचा दिया। अब मुझे उसे छुड़ाना है।
जिस नाव ने मुझे किनारे पहुंचाया, उस नाव को ही मुझे छोड़ना है। तभी तो मैं आगे जा पाऊंगा। आप यहां तक आए हो, वही सहायक हुई है, और वही अब आपको छुड़ाना है। सहायक भी वही हुई है। अब वही आपसे मुझे छुड़ाना पड़ेगा। आपकी धारणाएं तोड़नी पड़ेंगी। आप कर ही लिए हो। बिना छूटे ज्ञान नहीं होगा। रूप, शब्द, दृश्य, गंध, रस, स्पर्श। दृष्टा, दृश्य, दर्शन। जब तक आप रूप से मुक्त नहीं होगे, तब तक उपलब्धि नहीं होगी। मानसिक बंधन है। अब यह आखिरी जगह बैठे हो आप, जहां अब मुझे सब छुड़ाना पड़े। सिर्फ तुम, और तुम ही में सब कुछ है। जितना करके आए हो, वही सहायक भी हुआ है। अब वही मुझे आपसे मानसिक छुड़ाना है।
यह पीएचडी लेवल का स्थान है। आप आखिरी जगह आए हो। और जितना आप करके आए हो, वही सहायक हुआ है, और वही आपसे मुझे छुड़ाना भी है। क्योंकि शरीर से छोड़ के आए हो, लेकिन मानसिक नहीं छूटा है। अब मानसिक छुड़ाने का काम मेरा है। आप डटे रहो। जो हमारा सहायक बना है, वही मुझे छोड़ना भी पड़ेगा। जो कक्षा एक को अगली कक्षा तक पहुंचाने के लिए सहायक बनी, उस कक्षा को छोड़ना पड़ेगा। जो किताबें उस कक्षा तक पहुंचाने में सहायक हुईं, वही किताबें मुझे छोड़नी पड़ेंगी। यह एक चरण है, एक स्टेप है, एक सहायक है। यह जितना आप करके आए हो, मूर्ति पूजा, माला, यह सब सहायक हुआ यहां तक आने में। अब इसकी जरूरत नहीं है, क्योंकि अब आपको मैं में होना है। उस मैं को मैं से मिलन करवाना है। तो एक मैं को खत्म करना पड़ेगा। वह जड़ रूपी जो मैं है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09