प्रश्नोत्तर P5-0062 · भाग 5
असली सवाल क्या होता है? मौन में बैठूं तो मन में क्या रखूं?
असली सवाल यही है कि मैं कैसे इन सवालों से मुक्त हो जाऊं। सवालों से मुक्त होना मतलब मैं उस मूल में चला जाऊं। जब तक मेरे सवाल हैं, मतलब मैं कहीं और हूं। जब तक व्यक्ति रास्ता पूछ रहा है, तब तक वह कहीं और है। असली सवाल यही है कि मैं सवालों से कैसे मुक्त हो जाऊं। यह आखिरी सवाल है। अब इस सवाल तक, कि मैं सवालों से कैसे मुक्त हो जाऊं, यहां तक पहुंचने के लिए हो सकता है आपको अनेक सवाल करने हों। जब तक सवाल है, इसका मतलब मैं कहीं और हूं, मतलब मैं मार्ग में हूं। जब तक सवाल है, तब तक मैं मार्ग में हूं।
माइंड में कुछ नहीं रखना है, और मैं आपको माइंड में रखने के लिए कुछ दूंगा भी नहीं। पहले तो आप रुको। आप आए हो किसके लिए, पहले वह तो पक्का हो जाए। आप जिसके लिए आए हो, क्या वही चाहिए। क्या आप उस लायक हो। बस भाव बना लिया है। क्या मैं उसके लिए कुछ कर सकता हूं। अब जिसके लिए आए, वह आप जानते ही हो। तो बस रुकना है। माइंड में तो कुछ अलग से डालना ही नहीं है, क्योंकि माइंड में तो लेकर आए हो। तभी तो मैं वहां पहुंचा। जो भाव लेकर आया था, वह यहां पहुंचने के बाद नहीं रहा। अब देखो क्यों नहीं रहा।
बहुत सारे सवाल पूछूंगा, जवाब चाहूंगा, यह तो पूछ ही रहे हो। जो भी कुछ सोचा था, वह एकदम से नहीं रहा। जो सवाल मन में थे, वे नहीं हैं। वे शायद धीरे धीरे आएं, दोबारा मुलाकात में। कोई बात नहीं। मैं जितना पूछ सकता हूं, मेरे सामने आए, मैं पूछ लूं। आएंगे तो फिर मौका मिलेगा, फिर पूछ लूंगा। पूछ तो रहा ही हूं, चाहे अभी के हों, चाहे पहले के हों। हैं तो मेरे सवाल ही। हो सकता है यही सवाल, अपने जवाब से, उस सवाल को खत्म कर दे।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09