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प्रश्नोत्तर P5-0051 · भाग 5

क्या हर इच्छा को जाँचना ही ध्यान है? कैसे पता करें हम ध्यान में हैं?

कर्म हो रहा है। आपके द्वारा कर्म हो रहा है, उसे जाँचते रहना। वही ध्यान में ध्यान है। कहीं गलती ना हो जाए। ध्यान हर वक्त घटित होता है। चाहिए में हर समय तो ध्यान से परेशान हो। आप लोग किससे परेशान हो? ध्यान से। ध्यान से ही परेशान हो। बैठना चाह रहे हो, बैठ ही नहीं पा रहे। कुछ समय के लिए सोच रहे हो कि मेरा ध्यान कहीं नहीं जाए, और जाता ही है। ध्यान से ही परेशान हो। ध्यान से मुक्ति चाहिए। इस बात को समझो, तभी आप स्व में स्थिर हो पाओगे। आपके जीवन की सबसे बड़ी परेशानी का कारण ध्यान है। आप समझ नहीं पा रहे। मुद्रा मत लो। मुद्रा हटा दो। चिंतन कर रहे हो तो वो सही है। चिंतन करना जरूरी है। जो चल रहा है, चलने दो। सबकी स्थितियाँ अलग-अलग हैं। किसी के लिए चिंतन जरूरी है, इस समय आपके लिए नहीं। चिंतन से भी मुक्त हो जाओगे तो आपके लिए भी जरूरत नहीं। लेकिन किसी ना किसी स्थिति में ध्यान घटित तो होता है। उसके बाद परम ध्यान घटित होता है। उसे एकाकार कहते हैं। अपने आप घटता है। वहाँ प्रयास नहीं रहता। वहाँ उम्मीद नहीं रहती। अपने आप घटित होता है। वो परम ध्यान है। साक्षी भाव से आप अपने आप को जाँच रहे हो। साक्षी होते-होते आखिर में साक्षी भाव भी छूट जाएगा। यहाँ तक भाव भी छूट जाएगा। जब तक भाव है, तब तक आप बाहर हो। भाव है तो किसी में लिप्त हो। तभी तो भाव पैदा हो रहा है। भाव से भी आखिर में छूटना है। एकाकार हो गया, ये होने के बाद पता चल जाता है। आपको कैसे पता चला कि आप बालक थीं, फिर कुमार हुईं? विवाह हो गया, कैसे पता चला? माँ बन गईं, कैसे पता चला? ऐसे ही हो जाएगा। आप ही को पता चलेगा। अंदर से लगता है कुछ नहीं हुआ, आदमी बूढ़ा हो जाता है, बाल सफेद हो गए, शीशे में देखते तो दिखता है। अंदर से लगता है जवान हूँ। अंदर से जवान हो तो डाई क्यों कर रहे हो? पता है, मैं बूढ़ा हो गया। ये सब बोलने में अच्छा लगता है। अगर जवान होता तो कलर नहीं करता। खूबसूरत होता तो मेकअप नहीं करता। मेकअप के पीछे कहीं ना कहीं दाग-धब्बे थे। मेकअप उतार के सोना पड़ता है। आईने में मेकअप में भी आप देख रही हो, और बिना मेकअप का आप ही ने देखा। सामना तो करना ही पड़ रहा है। फर्क पड़ता है रसपान करने वाले को। आपके मेकअप का फर्क उसे पड़ता है जो रूप का रस लेता है, बैकग्राउंड का, कपड़े का, धन का, शरीर का, जानकारी का। यही रसपान है। जिसे कुछ नहीं करना है, उसे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। आप मेकअप करो या ना करो। जैसे एक बाप के सामने बेटी मेकअप करे या ना करे, कोई फर्क नहीं पड़ता। उसके लिए बेटी है तो है। मेकअप का फर्क वहाँ पड़ता है जहाँ लोग आपको नोचते हैं। धन का मेकअप हो, वैभव का हो, शरीर का हो, टैलेंट का हो। जिन्हें नहीं नोचना, उन्हें क्या फर्क पड़ता है। और खुद की बनाई हुई इमेज में फंसे हो। ओरिजिनल इमेज तो पता है। जिसे मेंटेन करने में फँसी हो, वो बनाई हुई इमेज है।

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वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18