प्रश्नोत्तर P5-0031 · भाग 5
आत्मज्ञान के बाद अगर लगता है कोई नहीं है / सब परमात्मा है, तो ज्ञानी समझाते क्यों? एकांत में क्यों नहीं चले जाते?
सबसे पहले मैंने आत्मा को जाना। आत्मा को जानने के बाद फिर मुझे या तो ये पता लग गया कि सब कुछ परमात्मा है, या तो ये पता लग गया कि कुछ नहीं है। पता लग जाता है। ये दोनों कहने का मतलब है, पता लग जाता है। लेकिन वो देखता है, आपकी दो स्थितियाँ। एक तो सब एक जैसे हैं, लेकिन अपने-अपने तरीके से अलग-अलग हो गए हैं। उस अलगाव से मुक्त होने के लिए वो सामने वाले को बताता है। दो स्थितियाँ बनती हैं। एक ये कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है। अब मेरे सामने या तो मेरे जैसे ही लोग खड़े हुए हैं। अलग-अलग परिस्थितियों से, अलग-अलग चीजों से, वे मेरे जैसे हैं, लेकिन अभी मेरे जैसे नहीं हैं। तो या तो सामने परमात्मा है, या तो कुछ भी नहीं है।
ये कौन बोला कि ज्ञानी आदमी हमेशा एकांत में चला जाता है? वो बात अलग है। आत्मज्ञान के साथ यही प्रॉब्लम है कि सब कुछ किताबों में लिखा है, उसको हम मानना नहीं चाहते। जब तक आपको नहीं होगा, आप उस मार्ग पर चलिए। होगा तो आप ही को पता चलेगा, और किसे पता चलेगा। और जब तक नहीं हो रहा है, तब तक यात्रा करिए। इतनी तो समझ होनी चाहिए। नहीं हुआ है तभी तो आप पूछ रहे हो। यात्रा करने पर पता चलेगा। आप कहीं जा रहे हैं और आपने किसी से मार्ग पूछा, तो उसका काम है आपको मार्ग बताना। मैं लक्ष्य तक पहुँचा हूँ कि नहीं पहुँचा, ये किसे पता चलता है? यात्रा करने वाले को। लक्ष्य नहीं है, तो बिना खोजे खोज ही खत्म हो जाए, ऐसा थोड़ी है। पूछ रहे हो, फिर पता क्यों पूछ रहे हो? असल में सब चीजें इतनी मिली हुई हैं कि समझ में नहीं आता। अगर आप कुछ पूछ रहे हो, इसका मतलब है कि आपका लक्ष्य कोई ना कोई है। नहीं तो पूछते कैसे?
वो बात बातों में बताई नहीं जा सकती। जो नहीं दिख रहा है, दिखने तक पहुँचाने के लिए तो बता सकता है। पहुँचा हुआ आदमी शब्दों से बताएगा, पर आखिर में शब्द खत्म हो जाते हैं। लोग ये कहते हैं कि जैसे ही हमने उसका वर्णन किया, वो वर्णन ही उसको खत्म कर देता है। वर्णन खत्म कर देता है। समझने के बाद सब खत्म हो जाता है। समझते-समझते इतना समझ में आया कि उसे नहीं समझा जा सकता, तो इतना तो समझ में आया। जिस दिन ये समझ में आ गया कि उसे नहीं समझा जा सकता, उस दिन आत्मज्ञान हो जाएगा।
उसकी दो स्थिति दिखती है। एक तो मूल स्थिति वाले दिखते हैं, जो मूल में हैं। और एक वो फंसे हुए दिखते हैं। फंसे हुए से कैसे अपने आप को छुड़ा ले, उसके लिए आत्मज्ञानी बस बात करता है। आत्मज्ञान करवाने के लिए आत्मज्ञानी कभी बात नहीं करता है। आप जहाँ उलझे हुए हो, जहाँ फंसे हुए हो, वहाँ से बस कैसे निकल जाओ। बस बात खत्म हो जाएगी। निकलने के बाद आपको पता चलेगा।
एक आदमी जिसने खाना खाया, उसका पेट भर गया। पेट भरने के बाद उसका मन नहीं रहता खाना खाने का। मेरी दो रोटी में ही पेट भर जाता था, सामने वाला समझ रहा है कि उसको चार चाहिए। जिसको आत्मज्ञान नहीं हुआ, वो कैसे समझे? माँगना बंद कर दीजिए, पता चल जाएगा पेट भर गया। अगर पेट भर गया तो आप भोजन ग्रहण नहीं करोगे। लेकिन आप भोजन की लाइन में भी खड़े हो और कह रहे हो मुझे भूख नहीं है, ये दोनों बातें नहीं हो सकतीं। अगर आपका पेट भर गया तो आप नहीं खाओगे। ना खाने से पता चल जाए। इंसान कमाने के बाद भी कमाता रहता है, खाने के बाद भी जोड़ता रहता है। वो लाइन पर लगेगा, आगे के लिए रखेगा, और यही प्रॉब्लम है इंसान के साथ। आप देखिए आप क्या कर रहे हो, आप कहाँ खड़े हो।
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वीडियो: कैसे पता चलेगा कि मुझे आत्मज्ञान हो गया है ? / योगीजी_का_सत्संग · 2025-04-18