आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0195 · भाग 3

(कुटिया में साधक) मुझे लगता है जीवन की यात्रा अनंत से अनंत है और जीरो उसका सेंटर पॉइंट है (जिसे शांति या समाधि कहते हैं)। अच्छे कर्म करने वाला प्लस साइड — अच्छी जगह, अच्छी विचारधारा के लोगों में — जन्म लेता है; बुरे कर्म वाला माइनस साइड — दूसरी योनियों या वैसी विचारधारा के लोगों में — जाता है; ऐसे ही सर्कल घूमता रहता है। यह सर्कल टूटे कैसे? मुक्त हो गए तो फिर हम कहां होंगे — आत्मा कहीं तो होल्ड करेगी? और धरती पर 9-10 हजार करोड़ लोग जन्म ले चुके, अभी 900 करोड़ जिंदा हैं — बाकी की आत्माएं कहां गईं?

आप ये समझ रहे हो कि हम एक सर्कल में घूम रहे हैं; लेकिन इस सर्कल को तोड़ना अध्यात्म है। हमारा जन्म किसमें होता है? चाहिए में होता है। अगर मैं किसी के पास गया, तो चाहिए में गया — इतनी बात समझ में आती है? अगर चाहिए नहीं, तो क्यों जाओगे? तो ये सर्कल तभी टूटेगा जब चाहिए से आप मुक्त हो जाओगे। (फिर कहां होंगे —) तो आप मूल जगह होंगे ना फिर। अभी चाहिए में आप इस संसार में हो; तो कुछ नहीं चाहिए में (भी) आप कहीं तो रहोगे। छोड़ो-छोड़ो, परमात्मा छोड़ो, आत्मा (छोड़ो) — आप अपना कल्याण करो। हमें क्या मतलब परमात्मा से। अगर आप (चक्र) तोड़ना चाहते हो, तो टूट जाएगा। चाहिए में (संसार में) जाते हो, और कुछ नहीं चाहिए में टूट जाएगा। (कुछ ना चाहिए में, निर्विकार-निर्विचार अवस्था में देह छूटे तो) उसे शरीर नहीं मिलेगा; वो मूल जगह होगा। (मूल तो सर्वव्यापी है —) जब मूल हर जगह है, तो फिर आप चाहिए से क्यों मुक्त होना चाहते हो? मैं वही कह रहा हूं — आप सुनते हो, उससे क्या होगा? (बाकी आत्माएं कहां गईं —) आपको ये बात पता है कि अगर आप एक मिट्टी का ढेला उठा लो, तो उसमें करोड़ों-अरबों जीव हैं? आप एक बार सांस लेते हो, एक बार करवट बदलते हो, तो लाखों जीव मर जाते हैं — पता है? तो वो भी तो जीवात्मा हैं; उनकी आत्मा कहां होल्ड होती है? अब बोलोगे कि हम तो दिन में (कितनी) सांस ले रहे, वो आत्माएं कहां हैं? मैं वही तो कह रहा हूं — इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है। भैया, देखो, ये सब छोड़ो, ये सब बातों में दम नहीं है। मैं कहां हूं, और मुझे कहां पहुंचना है — बस, बात इतने में खत्म हो जाती है। आप जीवात्माओं की गिनती नहीं कर सकते, और अपने को कोई फैक्ट्री तो लगानी नहीं है — समझना इस बात को। और फिर जानकारियां ही जब सिर दर्द कर रही हैं, तो (इनमें पड़कर) हम अपने आप को फंसा लेंगे; कोई मतलब नहीं है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01