आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0146 · भाग 3

गुरु जी, क्या हमारे लड़के (संतान) भी हमारे कर्म के फल हैं?

सबका एक-दूसरे से लेना-देना है। उनका कुछ निपटाना बाकी था, इसलिए वे आपके पास आए — लेनदेन बाकी था। हम यहां बैठे हैं, तो यह भी सब लेनदेन कर रहे हैं। हम आपको कब से कह रहे हैं — निकल लो; लेकिन क्या करें, तुम निकल नहीं रहे हो। हम काम कर रहे हैं निकालने का, तुम काम कर रहे हो फंसने का। हमारा काम है तुम्हें निकालना — हमें निकालने के लिए भेजा गया — अब तुम ही निकलने के लिए तैयार नहीं होते। आप कहते हो अब तो मिले — ठीक है भैया, आगे न मिलना, अब निकल लो। बात करते हो निकलने की और फिर कहते हो मुझे वापस वहां जाना है।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01