आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0138 · भाग 3

(लाइव) क्या गंगा आदि नदियों में स्नान करने से पूर्व में किए हुए पाप-दुष्कर्म नष्ट होते हैं? स्नान के लिए इतनी भीड़ होती है। अगर ऐसा होता तो भीष्म पितामह को इतने जन्मों का पाप क्यों भोगना पड़ा — वे तो गंगा पुत्र थे, उनका पाप क्यों नहीं धुला?

गंगा, नर्मदा मां हैं — इनसे हमें सीखना है। यह जहां से निकली हैं, अनेकों को लेते हुए गंगासागर, समुद्र में मिल गई हैं। इसे ध्यान से समझना — इनमें या तो गटर मिला या कोई नदियां मिलीं, सबको एक जैसा दर्जा देकर, पवित्र करते हुए निकल गईं। ऐसे ही हमारी जिंदगी में कोई अच्छा मिले चाहे बुरा मिले, मुझे दोनों में नहीं जाना है, मुझे अपना काम करते हुए निकल जाना है। यह है गंगा, यमुना या नर्मदा नहाने का मतलब — कि मुझे न अच्छे में जाना, न बुरे में जाना; मुझे काम को काम के तरीके से करके, अपने आप में रहते हुए निकल लेना है। यह बिल्कुल ईमानदारी से सीखना। अगर आप अच्छे या बुरे में नहीं गए तो आप ईमानदार हो ही। जिंदगी मिली है जीने के लिए, आप क्यों अच्छे-बुरे में जाते हो?

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01