प्रश्नोत्तर P3-0123 · भाग 3
प्याज-लहसुन के बारे में क्या है? (दो-तीन वीडियो में आपको इसके बारे में बोलते सुना पर मिला नहीं।) जैन लोग और कई परंपराएं इसे तामसिक या राक्षसों का मल कहकर नहीं खातीं — क्या इसे खाना चाहिए?
प्याज-लहसुन सात्विक भोजन है। जैसे आलू पैदा होता है, जैसे मूंगफली का दाना, जैसे चुकंदर, मूली, गाजर, अदरक — वैसे ही प्याज-लहसुन पैदा होता है। लहसुन संबंध करके तो पैदा नहीं करता; जैसे आप मूंगफली बो देते हो, वैसे ही लहसुन का एक दाना बोते हो और लहसुन निकलता है; आलू को काटकर बोते हो, वैसे ही। तो इसमें क्या है?
कर्म से आप तामसी, राजसी, सात्विक बन सकते हो, खाने-पीने से नहीं। शेर भी खाता है, तो वह कैसे तामसी? खान-पान का ध्यान रखना — ईमानदारी का भोजन हो, बस। बेईमानी का भोजन है तो आप तामसी बन जाओगे। और हमें उन जीवों को नहीं खाना चाहिए जो संबंध करके बच्चों को जन्म देते हैं — वहां हत्या है; उसमें काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह सब रहता है। जिसमें काम भाव है वह नहीं खाना चाहिए; जिसमें काम भाव नहीं है, वह खा सकते हो — वही मानव के लिए बना है। एक पेड़ इधर है, एक उधर — क्या वह एक-दूसरे से संबंध करके फल देता है?
लोग बोलते हैं यह राक्षसों का मल है। ठीक है भाई, अगर ऐसा है तो यह भी बता दो कि काजू, बादाम, किशमिश, छुहारा, मुनक्का, गन्ना, मूली, गाजर, मूंगफली — जो व्रत में खाते हो — ये किस देवता का मल हैं? उस देवता को कम से कम धन्यवाद तो दो। हम तो कुछ भी खाएं, एक ही कलर का निकलता है; उसने काजू इतना सफेद कैसे किया, चुकंदर लाल कैसे किया? परंपरा को पकड़ लेते हैं। अगर पकड़े होते तो मुझसे नहीं पूछते — कहीं न कहीं पकड़कर भी नहीं पकड़े थे। खाते हो और घुटन होती है? समझ लो, यह सब खाने के लिए बने हैं।
नियमों में भी राग-द्वेष उठ रहा है। अगर नियम थोपा हुआ है तो; अगर समझकर नियम अपना रहे हो तो नहीं। कौन सा नियम सही है, कौन सा गलत — वह आपको देखना पड़ेगा, जांचना पड़ेगा, समझदारी आप में होनी चाहिए।
(एक साधक ने बताया कि तीन महीने प्याज-लहसुन और तेज मसाले छोड़कर दाल-सब्जी का असली स्वाद आने लगा और पैकेट फूड छूट गया।) आपकी मानसिकता बता रहा हूं — घर में बोलोगे मैं बासी नहीं खाऊंगा, लेकिन बाजार का महीनों पहले बना, एक्सपायरी डेट वाला बिस्किट-नमकीन खाते हो, उसे सड़ा हुआ नहीं कहते। मैं तो तीन-चार दिन तक सब्जी गर्म करके खाता रहता हूं।
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