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प्रश्नोत्तर P3-0111 · भाग 3

अर्जुन के पास तो कृष्ण जैसे सद्गुरु बचपन से थे (बुआ के लड़के, रिश्तेदार) — तब उन्हें उपलब्धि क्यों नहीं हुई? कृष्ण ने गीता का ज्ञान युद्ध के समय ही क्यों दिया, पहले क्यों नहीं? क्या यह पात्रता की बात है?

अपने आप में कब आओगे? जब आपको कुछ नहीं चाहिए; जब तक कुछ चाहिए, नहीं आ सकते। तो मैं कह रहा हूं कि इतनी मेहनत करके आने से अच्छा है आप सीधा चले आओ — आना तो यहीं है, यह फिक्स है। कोई भी साधना करो, कोई भी विधि करो, आपको आना यहीं है। कृष्ण जब अर्जुन को ज्ञान दे रहे थे, अर्जुन कहीं गए क्या? लेकिन उन्होंने योग मार्ग, ध्यान मार्ग, क्रिया मार्ग, भक्ति मार्ग, योगी का, वैरागी का मार्ग बताया; उदासी, संन्यासी, महात्मा, चार वर्ण — ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र। अर्जुन बस वैसे ही खड़े रहे और उपलब्धि हुई। सद्गुरु तो पहले से था, तब क्यों नहीं हुआ? क्योंकि अर्जुन जब 'कुछ नहीं चाहिए' में आए, तब। इस दुनिया में कोई भी साधक कर-करके थक जाता है और जब वह 'कुछ नहीं चाहिए' में आ जाता है, तो सामने वाला सद्गुरु हो जाता है, होना पड़ता है; आपके सामने सद्गुरु ही टिकेगा, कोई सामान्य टिक ही नहीं पाएगा। 'कुछ नहीं चाहिए' में आए — यही पात्रता है; जब पात्र हुए तब उन्होंने दिया। फिर परीक्षा भी ली — हे अर्जुन, युद्ध करो — कि यह सच में 'कुछ नहीं चाहिए' में है या नहीं। अकेले अर्जुन ने बोला कि मुझे दर्द दिख रहा है, मैं अपनों को नहीं मार सकता, अपने लोगों को मारकर मुझे मिलता है तो मुझे नहीं चाहिए; बाकी सब तैयार थे। युधिष्ठिर को सत्यवादी बोला जाता है, लेकिन उनके अंदर झूठ था — जीतने के लिए, राजा बनने के लिए उन्होंने झूठ बोला; कृष्ण के कहने से नहीं बोला, क्योंकि कहने से मानते तो परम भक्त तो अर्जुन थे, वे फिर युद्ध करते। युधिष्ठिर के अंदर झूठ था, समय आने पर निकल गया। सद्गुरु पहले परीक्षा लेता है कि सच में कुछ नहीं चाहिए; जब देख लेता है कि पक्का इसे कुछ नहीं चाहिए, तब कहता है ठीक है। इस पृथ्वी पर कोई भी विधियां, साधना कर-करके थक जाता है; खोजते-खोजते जब खोजने के लिए कुछ नहीं बचता, अनुभव करते-करते अनुभव करने को कुछ नहीं बचता, तो शेष बचता है खोजी, अनुभव करने वाला। फिर कुछ देर बाद खोजी भी नहीं रहता — खोजी खोज के सहारे, अनुभवकर्ता अनुभव के सहारे टिका था। जैसे लाइट गई या तार काट दो, तो कुछ देर बाद फ्रीजर में ही बर्फ पानी हो जाएगी, निकालने की आवश्यकता नहीं, कनेक्शन काटना है। 'कुछ नहीं चाहिए' मतलब आपने अपने बनाए हुए संसार से कनेक्शन काट दिया; अब इंतजार करो। उस स्थिति में आओगे तो तुम खत्म हो जाओगे, शेष बचेगा सत्य। और आप क्या कर रहे हो — फ्रीजर को कम-ज्यादा कर रहे हो; कनेक्शन पूरी तरह कटेगा तभी पानी होगा। फिर सोचोगे बर्फ कहां गई, कहां से आई थी — वह कनेक्शन की वजह से थी। जितने लोगों को आज तक उपलब्धि हुई, वे 'कुछ नहीं चाहिए' में आए तब हुई; वहीं से उपलब्धि के लायक होते हैं। मां एक बार बच्चे को जन्म देती है, लेकिन गुरु आत्मा को जन्म देता है — बाकी सारा छुड़ाता है, सारे बंधन काटता है।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01