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प्रश्नोत्तर P3-0100 · भाग 3

गुरु जी, इस रंगमंच का आनंद कौन ले रहा है — इसका प्रेक्षक कौन है? क्या रोल हम खुद चुनते हैं?

एक तो आप, और एक श्रोता आपको बनना है। वे बोलते हैं — आपने क्या काम किया, वाह, इनको माला लाओ; मास्टर साहब, डॉक्टर साहब, क्या काम किया, लाओ पुरस्कार — यही रंगमंच है। असली रंगमंच, नकली रंगमंच — अगर देखा जाए, समझ लोगे तो यह भी नकली है। आप रोल की चॉइस करते हो, और फिर जांचा जाता है कि आप उस रोल के लायक हो कि नहीं; ऐसे ही रोल नहीं मिलेगा। आप सोचें — मैं जा रहा हूं; परमात्मा पूछे क्या बनेगा तू; मैं भिखारी बनूंगा। यहां आए तो बोले भिखारी ठीक नहीं, बड़ी बेइज्जती होती है — वहां से तो तुम भिखारी बनकर आए थे, लेकिन यहां मान के चक्कर में पड़ गए; अब भिखारी का रोल नहीं करना चाह रहे, राजा बनना चाह रहे हो, और उस राजा बनने में अनेक तरह की बेईमानियां कर दीं, और फिर रोल करके जा नहीं पा रहे। वहां से बड़ी खुशी से आए थे कि यह रोल लूंगा। इस पिंड में आते ही सब भूल जाओगे — ऐसी शर्त भी है कि तू इस पिंड में जाएगा तो मुझे भूल जाएगा। जीव कहता है — मैं याद रखूंगा, मैं तुझसे हूं, कैसे भूल जाऊंगा। ठीक है बेटा, जा। तब जब समझ जाता है कि यार फंस गया, तब पागल की तरह गुरु ढूंढता है, चिल्लाता है गुरु-गुरु। तब वह किसी गुरु को भेज देता है — जा, इसे मेरा पता बता, इसको बोल तेरे अंदर ही पता है। गुरु बस इतना ही बताने आता है कि बेटा तेरे अंदर उसका पता है, यह सब छोड़ दे। गुरु आपको याद दिलाता है जितना आप भूल गए हो, आपका बंधन याद दिलाएगा; बंधन से छुड़ाने की शक्ति आपके पास है ही; इधर-उधर हुआ तो वह आंतरिक ऊर्जा देता है। जैसे ही आपने छुड़ाया, अपने आप में हुए, एकाकार — बात ही खत्म। हर रोल कर-करके थक गए, इसीलिए यहां बैठे हो — भोग करके, भोजन करके, रोल करके थक गए। पहले अपना रोल अस्वीकार किया, बेईमानी की, अब अपने रोल में फंस गए और फंसकर निकलना चाहते हो; अब समझ में आ गया कि यह बनाया हुआ अस्तित्व है, नहीं रहेगा, मैं क्यों परेशान हो रहा हूं। जब उसका बालक थक जाता है तो वह किसी न किसी को भेजता है। इसीलिए कहा गया — गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात परब्रह्म — 'पर' मतलब पार कराने वाला, परब्रह्म का स्वरूप; वह अपना ही स्वरूप भेज देता है कि जा उसे बता। अब वह आपके लिए रोल करने आया है — आपको छुड़ाने के लिए उसे रोल लेना पड़ा, क्योंकि उसके अलावा आपको निकालेगा कौन? यहां जितने हैं, फंसाने वाले हैं। मां-बाप को पता है आखिरी क्या होगा, फिर भी कह रहे हैं तू भी आ, मेरा वंश बढ़ा; सबको पता है पैसा भी यहीं रह जाएगा — भाई हम अपने घर जाना चाहते हैं — नहीं, तू जा घर, लेकिन वंश तो बढ़ा जा।

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वीडियो: मां नर्मदा के किनारे सत्संग _ सतगुरु क्या होता है ? / #योगीजी_का_सत्संग · 2025-02-01