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प्रश्नोत्तर P3-0087 · भाग 3

(वही प्रश्न दोबारा, क्योंकि बहुत लोगों का ऐसा प्रश्न रहता है) रिश्ते-व्यवहार में सामने वाला मुझसे पैसे की इच्छा रखता है; मैं कह नहीं सकती कि पैसा लौटा देना या मैं मदद नहीं कर सकती — भावनात्मक बात हो जाती है। बदले में वह पैसा तो नहीं लौटाता, पर मेरे लिए गिफ्ट लाता है, ज्यादा केयर करता है, जबकि मुझे उसकी जरूरत नहीं (मेरे पास कपड़े बहुत हैं, फिर भी वह कपड़े लाए जा रहा है)। लगता है यह रिश्ता लेने-देने की बुनियाद पर टिका है। ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए?

देखिए आपके लिए सबसे जरूरी क्या है। यह चीज कभी न कभी तो टूटेगी। अगर आप उसका गिफ्ट लेना बंद करोगे तो भी उसे बुरा लगेगा, और फिर आप दोषी हो जाओगे — वह कहीं भी बोल सकता है कि पहले ले रहे थे, बाद में नहीं लिया, इसलिए हमारा रिश्ता टूटा; फिर वह अहंकारी भी हो जाएगा। आपका अधिकार आप पर है, आपकी ताकत पर है। तो आप देना बंद करो — गिफ्ट उसके द्वारा आपके दिए हुए से ही तो आ रहा है — तो गिफ्ट भी बंद हो जाएगा और आप पर दोष भी नहीं लगेगा। डायरेक्ट ही जीना पड़ेगा; इनडायरेक्ट यहां काम ही नहीं है। रिश्ते को महत्व दो — पैसे को क्यों दे रहे हो? देखना है कि रिश्ते की बुनियाद कहां से है, रिश्ते की शुरुआत कहां से हुई — कुछ दे रहे थे इसलिए हुई, या सीधा रिश्ता है। आपके पास एक बालक भी आता है तो कुछ लेने ही आता है; अगर नहीं चाहिए तो आएगा ही नहीं। रिश्ते की बुनियाद हमेशा लेनदेन पर ही टिकी होती है। लेनदेन हटा दिया जाए तो रिश्ता ही नहीं; रिश्ते का मतलब ही है कुछ देना-लेना। यहां भी हम बैठे हैं तो लेने-देने के लिए — लेनदेन न हो तो यहां भी आप क्यों बैठोगे? पूरे संसार का सार यही है — लेन और देन; हम एक दूसरे के पूरक हैं। लेनदेन खत्म तो तुम कहां और मैं कहां, न तुमसे मतलब न मुझसे। आध्यात्मिकता में कोई रिश्ता नहीं बचेगा। मेरा कोई रिश्ता नहीं रहा — मैं इस जंगल में हूं, आज तक मुझसे कोई मिलने नहीं आया। आप भी एक दिन यहीं आओगे, तो आपका सारा रिश्ता खत्म हो जाएगा।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 14 जून 2026 #योगी · 2026-06-14