प्रश्नोत्तर P3-0085 · भाग 3
आप दुकान पर कांटा-तौल नहीं देखते, सामान भी नहीं गिनते। हम संसारियों के लिए प्रश्न — अगर दुकानदार 50-100 ग्राम कम तौल रहा है और हम भी आपकी तरह न देखें, तो क्या हम उसकी बेईमानी को बढ़ावा नहीं दे रहे, उसे गिराने में सहायक नहीं बन रहे? ऑनलाइन सामान में भी हेराफेरी होती है और आम आदमी कोर्ट भी नहीं जा सकता — तो हम किस तरीके से अपने आप को निकालें?
मैं तो निकल गया हूं, इसलिए नहीं देख रहा हूं। लेकिन आप देखो — बस अपने अधिकार का लो। आप बढ़ावा मत दो। पहले आप अपने अधिकार में तो आओ; अभी तो आप अधिकार पार करके हो। अधिकार में आओगे तो एक दिन यहां भी चले आओगे। अभी आप डायरेक्ट यहां नहीं आ सकते, क्योंकि नहीं देखोगे तो घुटन होगी, रात-दिन बेचैन हो जाओगे।
अभी तक आपने क्या किया? एक-दो पॉइंट अपनी तरफ लिया। अब एक-दो पॉइंट कम ही लो। या तो एकदम बराबर एक ही तौल, या दुकानदार से कह दो — भाई मुझे ज्यादा मत देना, कुछ कम दे देना चलेगा, ज्यादा मत देना। अगर वह फिर भी एक-दो पॉइंट ज्यादा दे तो उसकी मर्जी। कुछ चीजें ऐसी हैं कि वह काट नहीं सकता — तो कह दो, भाई तू मेरी तरफ कर रहा है, तो एक निकाल दे ताकि कांटा तेरी तरफ हो जाए; या तू पैसे एक्स्ट्रा ले ले। अगर निकलना है तो इस तरीके से जीना पड़ेगा। मुझे निकलना है, तो मुझे ये सब देखना पड़ेगा।
सबसे ज्यादा चक्कर यही है कि कांटा मेरी तरफ ही होना चाहिए — हर बात में, हर जगह। उसकी तरफ क्यों नहीं? जब तुमने अपनी तरफ का भाव बनाया तो उसकी तरफ का भी देखो। व्यवहार में भी ऐसे ही करते हैं — तेरी गलती ज्यादा है, मेरी कम।
मजबूत लोग ही कमजोर लोगों को बेईमान बनाते हैं। धनिया-मिर्चा फ्री में चाहिए तो वह कहां से देगा? अंदर बटखरा लगाएगा, चुंबक लगाएगा, कांटा मारेगा। चोरी आप उसे सिखा रहे हो, बेईमानी आप उसे सिखा रहे हो — उसका भी पेट है, उसके भी बच्चे हैं। मजबूत आदमी हमेशा बेईमान पैदा करता है; अगर मजबूत आदमी सुधर जाए तो कमजोर भी सुधर जाएगा। आपको लगता है एक-दो पॉइंट है, लेकिन उस एक-दो पॉइंट ने तुम्हें कितना गिरा दिया — ऐसे-ऐसे हम बहुत गिर जाते हैं।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 14 जून 2026 #योगी · 2026-06-14