प्रश्नोत्तर P3-0037 · भाग 3
रियली कौन आत्मज्ञानी है, कौन सिद्धियों से काम कर रहा — हम जांच नहीं सकते। आत्मज्ञानी कैसे पहचाने? जांच की जरूरत?
जांचने की जरूरत नहीं — यही गलती। सिर्फ अपने प्रश्न रखो। अगर प्रत्यक्ष उत्तर मिल रहे हैं, सारे संशय का निवारण हो रहा है — वही आत्मज्ञानी। गुरु/आत्मज्ञानी के पास सिर्फ आत्मिक कल्याण के लिए जाओ; और प्रश्न ले गए तो गड़बड़ हम ही, गड़बड़ लोग मिलेंगे। आत्मिक कल्याण का मार्ग पूछोगे तो सामने आत्मज्ञानी ही टिकेगा। कामना वाला प्रश्न — बच्चे IAS, रोग ठीक, गाड़ी-बंगला — तो आत्मज्ञानी मिलेगा ही नहीं। जैसी क्वालिटी वैसे लोग जुड़ते हैं। अच्छे शिक्षक की पहचान — अच्छे से पढ़ा दे। आत्मज्ञानी की पहचान — सारे संशय हट जाएं, प्रश्नों के प्रत्यक्ष उत्तर, मार्ग बता दे कि आगे कर्मबंधन न बंधे। बाह्य तौर से कोई नाप नहीं; नापने की जरूरत भी नहीं। अहम भाव में नापना छोड़ो — सवाल के जवाब चाहिए। काम करने के बाद पता चलता है स्थिति। जिज्ञासा शांत करे, संशय मिटाए, मार्ग बताए — सीधी बात। आत्मज्ञानी प्रमाण नहीं देता, आश्वासन/बहाना नहीं, बैसाखी नहीं — प्रत्यक्ष बात, पैरों में बल। सारथी भी गुरु बन सकता है — बाहरी आवरण मत देखो, ज्ञान का प्रतीक देखो।
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वीडियो: गुरु तो दातार है ही,अगर शिष्य चाहे गुरु को कुछ देना ,तो वह क्या दे सकता है ?योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-06