प्रश्नोत्तर P3-0010 · भाग 3
सत्संग सुनते हुए समझ आती है, गिरने पर भी महसूस होता है; फिर भी समझ छोटी अवधि की लगती है और ऑटोमेटिक गिरना पक्का हो चुका है। समझ को कैसे पक्का करूं कि मार्ग से न भटकूं — उठना भी गिरने जितना पक्का हो जाए?
समझ तो है ही है। पक्का यह करना है — हां या ना। अगर ना, तो अब मुझे वहां से निकलना है; निकलने के लिए और कहीं जाना होगा। किसी वस्तु को एक जगह से उठाओगे तो रखने के लिए दूसरा खाली स्थान चाहिए। जीने का आधार-बेस चाहिए; नहीं तो पागल जैसे हो जाएंगे।
अगर पक्का नहीं कर पा रहा कि लक्ष्य तक पहुंचना है या नहीं — मतलब लक्ष्य पक्का नहीं, या पीछे से पूरी तरह नहीं आए हो। पीछे ऑप्शन खड़ा है; आगे लक्ष्य मात्र कल्पना है। लक्ष्य खोज नहीं पा रहा — पीछे विकल्प भी है कि छोड़ो यार।
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वीडियो: मेरी समझ कैसे पक्का करूं ? #योगी · 2026-01-08