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प्रश्नोत्तर P21-0117 · भाग 21

गुरु जी, जब हम सब कुछ छोड़ देंगे, तो बाद में क्या करेंगे?

त्याग ही परम सुख है, परम आनंद। त्याग क्या? अपनी बुराइयों का त्याग करना है, अपनी बुरी आदतें छोड़नी हैं — हमें लोगों को नहीं छोड़ना है। लोगों से अपने तरीके से हमने जो उम्मीद बना रखी है, वो तरीका छोड़ना है; मान-सम्मान, बड़ा बनना, छोटा बनना, दिखावा — ये सब छोड़ना है। आप एक बात बताइए, अपने जीवन में बेईमानी के अलावा अलग क्या किया? ईमानदारी तो कर्म में अपने आप होती है, करने की जरूरत नहीं — बस यही छोड़ दो, यही आपका सब कुछ है। चार को हटा दो, आपका बनाया हुआ अस्तित्व मिट जाएगा — मान की इच्छा, दिखावा, बड़ा-छोटा बनने की इच्छा, और योग्यता से ज्यादा पाने की इच्छा। छोटा बनने की इच्छा भी होती है — जब कोई आपसे छोटा व्यक्ति सही कहता है और आप सिद्ध नहीं कर पाते, तो कहते हो "चलो भैया तुम बड़े, मैं छोटा" — वहां भी छोटे के बहाने अपने को बड़ा बनाना चाहते हो। ये चारों आप छुप-छुप के करते हो, किसी से कह नहीं सकते — घर में भी नहीं बता सकते कि मैं मान के लिए जीता हूं, शर्म आएगी, क्योंकि चारों गंदे हैं। इन चार से ना आपको लाभ, ना समाज को — सिर्फ पीड़ा; घुटन, अशांति, पीड़ा, अज्ञानता का आधार यही है, इसी पर आपका बनाया हुआ अस्तित्व खड़ा है। ये चारों हटा दो, आप उस परम आनंद में हो जाओगे। सब कुछ का मतलब वस्त्र, भोजन, घर छोड़ना नहीं — महापुरुष भी भोजन करते हैं, संसाधन का उपयोग करते हैं; जरूरत में जियो। हमने घर छोड़ा तो अब इतने लोग जुड़ गए कि उनके लिए इस शरीर का उपयोग कर रहे हैं — तो लोगों को क्या छोड़ा? ये चार आपके बस में हैं, इसके लिए कोई साधना-तपस्या नहीं करनी — हटा दो। हां, फिर ना इज्जत मिलेगी, ना अपमान।

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वीडियो: मुझे कहां होना है ? कलबुर्गी कर्नाटक में पुनः सत्संग 12 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-14