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प्रश्नोत्तर P21-0071 · भाग 21

गुरु जी, आप कहते हैं साल में कम से कम एक महीना एकांत में जाओ, पर वापस इसी संसार में आना पड़ता है और अभिमन्यु के चक्रव्यूह की तरह फिर फंस जाते हैं — इससे कैसे बचें?

वहां एक महीना रहते हो तो वहां सिखाया जाता है कि किस तरीके से जाकर संसार में फिर से रहना है; वो सीखकर आते हो। फिर दूसरे साल जाना है, क्योंकि मैं रह पाया कि नहीं, कुछ त्रुटि हो गई तो फिर अपने आप को मजबूत करने वहां जाना पड़ता है — जैसे रोज वही भोजन करते हो, पर शरीर को ऊर्जा मिलती है तभी काम कर पाता है। गृहस्थ हो तो साल में कम से कम एक बार एक महीने के लिए जाओगे, क्योंकि वहां सीखकर आओगे कि संसार में कैसे जियूं कि फंसूं नहीं — लिप्त होकर अलिप्त रहूं: शरीर से लिप्त हो रहा हूं, लोग देख रहे हैं, लेकिन मैं अलिप्त। अगर तुम्हारा फंसना बंद हो गया, तो निकलना उसी समय पक्का। यहां हर चीज परिवर्तनशील है — वस्तु का यूज़ करो या ना करो, नाश तो दोनों का होगा; ऐसे ही अगर नए बंधन बांधना बंद कर दिया तो बंधे हुए बंधनों का नाश हो ही जाएगा।

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