प्रश्नोत्तर P21-0068 · भाग 21
गुरु जी, हमारे गुरु नित्यानंद जी महाराज की वाणी है "निभाओ तो प्रेम की घाटी निभाओ तो गुजारे" — उन्होंने गुरु पर छोड़ दिया कि आप निभाओ तो गुजारा है, मेरे बस की बात नहीं। उस प्रेम के बारे में बताइए।
प्रेम किसी से नहीं। जैसा गुरु कह रहा है उसमें जी — वही प्रेम है। प्रेम का मतलब है मैं तेरे साथ बह रहा हूं, यही प्रेम है। तो जैसा गुरु कह रहा है वैसा कर, वही प्रेम है।
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वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 20 जुलाई 2026 #योगी · 2026-07-20